
CM हेल्पलाइन शिकायत की जांच पर उठे सवाल:
शिकायतकर्ता को बिना बताए स्थल निरीक्षण, शिकायत से जुड़े अधिकारी पर ही जांच की जिम्मेदारी का आरोप

जीशान अंसारी की कलम से रतनपुर/बिलासपुर। वन परिक्षेत्र रतनपुर के कक्ष क्रमांक 2522 एवं 2523, ग्राम कंचनपुर में कैम्पा मद से कराए गए लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र के गैर-प्लांटेशन एवं वृक्षारोपण कार्य में कथित अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायत की जांच अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है।


शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान कराए गए कार्य में गुणवत्ताहीन तार फेंसिंग का उपयोग किया गया तथा फेंसिंग सामग्री में अनियमितता हुई है। शिकायत CM हेल्पलाइन क्रमांक WP260700089485 के माध्यम से की गई थी।


शिकायत की जांच के बाद विभाग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाए जाने की बात कही गई। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि अधिकारियों द्वारा कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन किया गया तथा सामग्री की गुणवत्ता और अभिलेखों की जांच के बाद भुगतान की कार्रवाई की गई।

लेकिन शिकायतकर्ता ने जांच प्रक्रिया पर ही उठाए सवाल
शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्हें स्थल निरीक्षण की कोई सूचना नहीं दी गई और न ही उनकी उपस्थिति में शिकायत की जांच की गई। उनका आरोप है कि जिस विभागीय अमले पर शिकायत में सवाल उठाए गए थे, उसी स्तर के अधिकारी/कर्मचारी से जांच कराई गई।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि डिप्टी रेंजर शमीम खान की भूमिका को लेकर शिकायत किए जाने के बावजूद जांच प्रक्रिया में स्वतंत्रता नहीं बरती गई। इसके अलावा,
शिकायतकर्ता के अनुसार जांच के दौरान विभागीय चौकीदारों एवं कर्मचारियों को ही गवाह बनाकर पंचनामा पर हस्ताक्षर कराए गए।
पंचनामा भी बना सवालों का विषय
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार जांच के दौरान पंचनामा तैयार किया गया है, जिसमें विभागीय कर्मचारियों/चौकीदारों के हस्ताक्षर दिखाई दे रहे हैं। शिकायतकर्ता का सवाल है कि यदि शिकायत विभागीय कार्यों एवं कर्मचारियों की भूमिका से संबंधित थी, तो स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पंचों की मौजूदगी में जांच क्यों नहीं कराई गई?

शिकायतकर्ता ने CM हेल्पलाइन में जांच के परिणाम पर असंतोष व्यक्त करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
50 हेक्टेयर क्षेत्र में 20 हजार पौधों का लक्ष्य
कंचनपुर में लगाए गए विभागीय सूचना बोर्ड के अनुसार परियोजना के तहत लगभग 50 हेक्टेयर क्षेत्र, वर्ष 2024-25 में APO तथा वर्ष 2025-26 में वृक्षारोपण कार्य और करीब 20,000 पौधों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में तार फेंसिंग की गुणवत्ता और सामग्री की वास्तविक स्थिति महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यही फेंसिंग लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए उपयोग की जाती है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शिकायत की दोबारा किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय अधिकारी या जांच दल से जांच होगी? क्या स्थल निरीक्षण की सूचना शिकायतकर्ता को दी जाएगी? और क्या फेंसिंग की गुणवत्ता, खरीदी गई सामग्री, स्टॉक रजिस्टर, बिल-व्हाउचर, माप पुस्तिका तथा मौके पर मौजूद सामग्री का स्वतंत्र मिलान कराया जाएगा?
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।















