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 कोटा ब्लॉक में शिक्षा व्यवस्था चरमराई – बाल श्रम, फर्जी शिक्षक और प्रशासनिक लापरवाही उजागर शिक्षा विभाग की गुणवत्ता पर तीखा सवाल..? 

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, बिलासपुर/कोटा : प्रदेश की सरकार पहले से ही हड़ताल, यूरिया-खाद संकट, अवैध रेत उत्खनन और जल-जंगल-जमीन जैसे मुद्दों पर विपक्ष के घेराव में है। वहीं अब शिक्षा विभाग के कारनामे भी सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं। बता दे पूरा मामला कोटा ब्लॉक अंतर्गत शासकीय विद्यालयों चुरेली की है जहाँ दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही देखने को मिल रहा है। यहां बच्चों के शिक्षा से जुड़े गंभीर मामला बन चुका है।

बालिका से मध्यान्ह भोजन बनवाया जा रहा :- 

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चुरेली शासकीय विद्यालय में 14 वर्षीय बालिका से मध्यान्ह भोजन बनवाया जा रहा है, जो “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” योजना की भावना का खुला उल्लंघन है। खाद्यान्न को गंदगी में रखा जा रहा है और स्थिति यह है कि स्कूल में रखे खाद्यान्न की सामग्री को जमीन पर रखकर ऊपर झाड़ू और कचरा डाल दिया जाता है, और वही भोजन बच्चों को परोसा जाता है।

दूसरी ओर एक फर्जी शिक्षक शराब पीकर पढ़ा रहा -:

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आमागार प्राथमिक शाला में पिछले दो वर्षों से एक पैरालाइज शिक्षक के स्थान पर उनका दामाद – जो कि शिक्षक नहीं है – स्कूल में आकर शराब के नशे में पढ़ाने का नाटक कर रहा है। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठता हैअब सोचने वाली बात हो गया की एक शराबी व्यक्ति बच्चों को किस स्तर की शिक्षा देगा और उस स्कूल के संकुल प्रभारी स्कूल की निरिक्षण तक नहीं कर रहे है।

विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी की लापरवाही – :

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विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी को जब इन मामलों से अवगत कराया गया तो उन्होंने केवल इतना कहा – “मैं आकर देखता हूं।” यह प्रतिक्रिया बताती है कि शिक्षा विभाग कागज़ी कार्रवाई तक सीमित है और जमीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार की पहल नहीं हो रही। विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठते हैं कि आखिर नोटिस थमाना ही क्या समाधान है.? शिक्षकों को अब पढ़ाने से ज्यादा नोटिस का जवाब देने में महारत हासिल हो चुकी है। 

शासकीय कर्मचारी की सच्चाई :-

अधिकांश सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाते हैं। कारण साफ है – उन्हें खुद मालूम है कि सरकारी स्कूलों का हाल बेहाल है। शिक्षक देर से स्कूल पहुंचते हैं और जल्दी घर लौटने की चिंता में रहते हैं।

प्रदेश सरकार ऐसे गंभीर मामले को नजर अंदाज न करे। विभागीय अधिकारी केवल नोटिस थमा देते है कार्यवाही के नाम पर शून्य नजर आ रहा है। ज़िम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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