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कुड़कई पंचायत में दोहरा भ्रष्टाचार! सचिव संतराम यादव पर घोटाले के गंभीर आरोप — अब खुद पर लगे दाग मिटाने की कवायद। 

पेंड्रा। ग्राम पंचायत कुड़कई के सचिव संतराम यादव एक बार फिर भ्रष्टाचार के गहरे घेरे में हैं। पशु पंजीयन ठेका घोटाला और नाली निर्माण में अनियमितता के मामलों में उनका नाम सामने आने के बाद अब सचिव अपनी भूमिका को बचाने और पुराने विवादों पर पर्दा डालने की कोशिश में जुटे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे न केवल अपने भ्रष्टाचार को झूठ साबित करने की कवायद कर रहे हैं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे विवादों को भी दबाने में लगे हुए हैं।₹61 लाख का ठेका, ₹27.78 लाख की वसूली अधूरी वर्ष 2024-25 में पंचायत स्तर पर पशु पंजीयन ठेका ₹61 लाख में स्वीकृत किया गया था। ठेकेदार ने मात्र ₹33.22 लाख ही जमा किए, जबकि शेष ₹27.78 लाख रुपये अब तक वसूल नहीं किए गए हैं। उस समय सचिव संतराम यादव ने स्वयं को “हड़ताल पर” बताया था, लेकिन जांच में यह खुलासा हुआ कि ठेका स्वीकृति और वसूली से संबंधित फाइलों पर उन्हीं के हस्ताक्षर मौजूद हैं, जिससे उनकी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।

ठेकेदार भरत कश्यप का गंभीर आरोप :- 

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पशु पंजीयन ठेका से जुड़े ठेकेदार भरत कश्यप ने सचिव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है। 

> “मेरे साथ पंचायत का कोई पंजीकृत अनुबंध नहीं था, फिर भी मैंने पंचायत को पैसा जमा किया। उस दौरान सचिव संतराम यादव ने मुझसे ठेका के नाम पर अतिरिक्त पैसे लिए। जब मेरा ठेका निरस्त किया गया, तब एक महीने तक बाजार की वसूली पंचायत ने की, लेकिन उसका कोई हिसाब नहीं दिया गया। उसके बाद मेरे पिता को नया ठेका दे दिया गया।”ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा प्रकरण सचिव और ठेकेदारों के बीच मिलीभगत का उदाहरण है। वसूली की रकम का कोई स्पष्ट हिसाब नहीं है, वहीं पुराने बकायेदारों को फिर से ठेका दिए जाने से पंचायत की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

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नाली निर्माण में भी गड़बड़ी :- 

इसी बीच, अक्टूबर 2024 में दर्ज शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 15वें वित्त आयोग से देवीप्रसाद के घर से माताचौरा मार्ग तक बनी नाली में घटिया सामग्री और फर्जी मापदंडों का उपयोग हुआ। ग्रामीणों ने बताया कि नाली कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो गई। शिकायत की जांच एक साल बाद भी अधूरी है, जिससे लोगों में आक्रोश है।

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अब ग्रामीण पूछ रहे हैं —

> “क्या सचिव अब यह साबित करना चाहते हैं कि पंचायत भवन में शराब पीते हुए पकड़े जाने की घटना झूठी थी?”

“क्या उनका वह वायरल वीडियो, जिसमें वे नशे की हालत में पंचायत भवन में दिखे थे, अब मनगढ़ंत करार दिया जाएगा?” “और क्या वर्ष 2024 में दर्ज नाली निर्माण की शिकायत को भी झूठा बताया जाएगा?” ग्रामीणों का कहना है कि सचिव हर बार “मुझे जानकारी नहीं” कहकर जिम्मेदारी से बचते हैं, जबकि सभी दस्तावेज उनके हस्ताक्षर से जुड़े हुए हैं।

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