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राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों के आवास में बड़ा खेल? बैगा परिवारों के प्रधानमंत्री आवास पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, राज्य स्तरीय जांच की मांग

जीशान अंसारी की रिपोर्ट, कोटा/खोंगसरा : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना एवं जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लाखों रुपये स्वीकृत किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक नजर आ रही है। कई गांवों में आवास निर्माण अधूरा पड़ा है, कहीं निर्माण शुरू ही नहीं हुआ, तो कहीं गुणवत्ताहीन निर्माण ने हितग्राहियों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनप्रतिनिधियों ने राज्य स्तरीय जांच की मांग उठाई है। जनमन योजना के अंतर्गत बैगा परिवारों को लगभग 2.50 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाती है, ताकि वे सुरक्षित और सम्मानजनक आवास में रह सकें। लेकिन आरोप है कि इस योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है और वास्तविक हितग्राही आज भी कच्चे और जर्जर घरों में रहने को मजबूर हैं। कई गांवों में अधूरे, जर्जर और मानकविहीन आवास जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत खोंगसरा, ग्राम पंचायत टाटीधार और इनके आश्रित दूरस्थ बैगा बहुल ग्रामों में योजना के तहत स्वीकृत आवासों की स्थिति बेहद खराब है। कहीं आवास का निर्माण शुरू ही नहीं हुआ, तो कहीं आधा-अधूरा छोड़ दिया गया। कई मकानों में छत टूटने की स्थिति में है, खिड़कियां ढीली होकर झूल रही हैं, दरवाजे तक नहीं लगाए गए हैं और कई जगह फर्श का काम भी अधूरा है। कुछ मकानों का आकार इतना छोटा बताया जा रहा है कि ग्रामीण उन्हें “माचिस की डिब्बी जैसा घर” कह रहे हैं। कोरोना काल के बाद स्वीकृत आवास आज भी अधूरे बताया जा रहा है कि कोरोना काल के बाद जिन बैगा परिवारों के आवास स्वीकृत हुए थे, उनमें से अनेक आज तक पूर्ण नहीं हो पाए हैं। इस दौरान पंचायत प्रतिनिधि बदले, सरपंच बदले, लेकिन हितग्राहियों की स्थिति नहीं बदली। पुराने और नए जनप्रतिनिधि एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जबकि बैगा परिवार अब भी असुरक्षित कच्चे घरों में जीवन गुजारने को विवश हैं।

कैसे हो रहा है कथित भ्रष्टाचार :- 

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स्थानीय स्तर पर आरोप है कि बैगा समुदाय के कई परिवार अशिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण आसानी से ठगी का शिकार हो जाते हैं। कथित तौर पर कुछ ठेकेदार पहले हितग्राहियों का विश्वास जीतते हैं और समय पर मकान बनाकर देने का आश्वासन देते हैं। इसके बाद बैंक और चॉइस सेंटर के माध्यम से हितग्राहियों के खातों से किश्त की राशि निकलवा ली जाती है। शुरुआत में निर्माण कार्य तेज गति से दिखाया जाता है ताकि अगली किश्त स्वीकृत हो जाए। लेकिन जैसे-जैसे राशि निकलती जाती है, निर्माण की गति धीमी पड़ जाती है और अंतिम किश्त के बाद काम अधूरा छोड़ दिए जाने के आरोप लग रहे हैं।

किन पर उठ रहे सवाल :- 

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ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के आरोपों के अनुसार इस पूरे मामले में केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि योजना से जुड़े कुछ जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी भी सवालों के घेरे में हैं। आरोप है ठेकेदार स्थानीय प्रभावशाली लोगों और जनप्रतिनिधियों से सांठगांठ कर काम लेते हैं। तकनीकी सहायक और आवास शाखा से जुड़े संबंधित अधिकारी बिना पर्याप्त निरीक्षण के जियो-टैगिंग और किश्त स्वीकृत कर देते हैं। जो हितग्राही स्वयं अपना घर बनाना चाहते हैं, उन्हें तकनीकी और प्रशासनिक सहयोग कम मिलता है।उनकी किश्तें लंबे समय तक अटकती हैं, जबकि ठेकेदार के माध्यम से बनने वाले आवासों की किश्तें अपेक्षाकृत जल्दी स्वीकृत हो जाती हैं। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह योजना के उद्देश्य और पारदर्शिता दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

सुशासन दिवस में उठी राज्य स्तरीय जांच की मांग :- 

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सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधियों ने इस कथित भ्रष्टाचार की राज्य स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि बैगा जैसे विशेष रूप से संरक्षित जनजातीय समुदाय के अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और अधूरे आवासों को तत्काल पूर्ण कराया जाए। प्रशासन से अपेक्षा प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य गरीब और वंचित परिवारों को सम्मानजनक जीवन देना है। यदि जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण लाभार्थी ही ठगे जा रहे हैं, तो यह केवल योजना की विफलता नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और बैगा परिवारों को न्याय कब तक मिल पाता है। प्रतिक्रिया-प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे महत्वाकांक्षी योजना में भ्रास्टाचार की शिकायत मिली हैं। जिसमे बैगा जनजाति के परिवारों के साथ अन्याय हो रहा है। मैं स्वयं इसकी जांच करूंगा और मुख्यमंत्री जी से मिलकर इसकी शिकायत करूंगा। दोषियों को छोड़ा नही जाएगा। शासन में बैठे लोगों को जागना चाहिए,बैगा परिवारों के हित के लिए सरकार विभिन योजनाएं संचालित कर रही है। लेकिन पर्याप्त मोनिटरिंग के बिना जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। दोषियों पर कार्यवाही हो

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