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अवैध रेत से भरा टीपर पकड़ा गया, दस्तावेज नहीं मिले, फिर भी कार्रवाई ठंडी क्यों? मरवाही में माफिया पर मेहरबानी या अंदरूनी दबाव!

अवैध रेत से भरा टीपर पकड़ा गया, दस्तावेज नहीं मिले, फिर भी कार्रवाई ठंडी क्यों? मरवाही में माफिया पर मेहरबानी या अंदरूनी दबाव!

उसाड बीट के जंगलों से लंबे समय से रेत उत्खनन, बरौर बैरियर पर पहली कार्रवाई के बाद भी जांच धीमी

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मरवाही वन परिक्षेत्र:- जिले में अवैध रेत परिवहन के खिलाफ बरौर बैरियर पर हुई कार्रवाई के बाद अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बीती रात उसाड बीट के जंगल क्षेत्र से अवैध रूप से रेत परिवहन करते एक टीपर वाहन को पकड़कर वन विभाग ने जब्त किया। वाहन चालक के पास किसी भी प्रकार के वैध दस्तावेज नहीं पाए गए, जिसके बाद वाहन को वनपरिक्षेत्र मरवाही कार्यालय में जप्त कर खड़ा कर दिया गया है।

 

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जानकारी के अनुसार, उक्त टीपर छत्तीसगढ़ से मध्यप्रदेश की ओर अवैध रूप से रेत लेकर जा रहा था। बरौर बैरियर पर जांच के दौरान चालक से परिवहन संबंधी दस्तावेज मांगे गए, लेकिन वह कोई वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद वन अमले ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।

जंगल से लगातार उत्खनन, मिलीभगत के संकेत

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इस मामले ने उसाड बीट के जंगलों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्र से लंबे समय से अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का कार्य जारी है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बिना विभागीय जानकारी या सहयोग के जंगल क्षेत्र से लगातार रेत निकासी कैसे संभव हो रही है।

वन रक्षक की भूमिका पर सवाल

सूत्रों की मानें तो संबंधित वन रक्षक की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। उल्लेखनीय है कि उक्त वन रक्षक पर पूर्व में भी वन संपदा की तस्करी करवाने के आरोप लग चुके हैं, लेकिन उन मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी थी। ऐसे में वर्तमान घटना ने एक बार फिर विभागीय कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहली कार्रवाई, फिर सुस्ती

बरौर बैरियर बनने के बाद इसे पहली बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है, लेकिन इसके बाद जांच की धीमी रफ्तार चर्चा का विषय बनी हुई है। वाहन जब्ती के बावजूद अब तक न तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो पाया है और न ही जिम्मेदारों पर कोई बड़ी कार्रवाई सामने आई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच नहीं की गई, तो अवैध रेत उत्खनन का यह खेल यूं ही चलता रहेगा। आवश्यकता इस बात की है कि रेत के स्रोत, परिवहन में शामिल लोगों और संभावित मिलीभगत की पूरी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

फिलहाल जब्त टीपर वनपरिक्षेत्र कार्यालय मरवाही में खड़ा है और विभागीय कार्रवाई जारी होने की बात कही जा रही है। अब देखना होगा कि यह कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है या फिर अवैध रेत कारोबार के पूरे नेटवर्क पर प्रभावी प्रहार किया जाता है।

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