LIVE UPDATE
झमाझम खबरें

“रिजल्ट खराब… और सीधे निलंबन!”: बालोद कार्रवाई पर भड़का शिक्षा जगत, कलेक्टर पर मनमानी के आरोप…!

“रिजल्ट खराब… और सीधे निलंबन!”: बालोद कार्रवाई पर भड़का शिक्षा जगत, कलेक्टर पर मनमानी के आरोप…!

रायपुर।बालोद जिले में परीक्षा परिणाम खराब होने के आधार पर 8 प्राचार्यों को निलंबित किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन ने इस कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे “एकतरफा, नियमविरुद्ध और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ” करार दिया है। मामले को लेकर आयोजित आपात बैठक में फेडरेशन पदाधिकारियों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “क्या अब शिक्षा व्यवस्था की हर कमी का ठीकरा केवल प्राचार्यों के सिर फोड़ा जाएगा?”

ये खबर भी पढ़ें…
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया शुरू, ऑनलाइन पंजीयन की तिथियां जारी
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया शुरू, ऑनलाइन पंजीयन की तिथियां जारी
June 23, 2026
पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति आवेदन प्रक्रिया शुरू, ऑनलाइन पंजीयन की तिथियां जारी गौरेला पेंड्रा मरवाही, 23 जून 2026/अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

फेडरेशन ने साफ शब्दों में कहा कि परीक्षा परिणाम कई सामाजिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं। ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में विद्यार्थियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि, संसाधनों की कमी, शिक्षकों की उपलब्धता, पारिवारिक परिस्थितियां और स्थानीय वातावरण जैसे अनेक कारण परिणामों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में केवल प्रतिशत कम आने पर प्राचार्यों को कठोर दंड देना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र को भय के वातावरण में धकेलने जैसा है।

बैठक में यह सवाल भी जोरशोर से उठा कि क्या किसी कलेक्टर को सीधे प्राचार्यों को निलंबित करने का अधिकार है? फेडरेशन का कहना है कि प्राचार्य पद का नियुक्तिकर्ता प्राधिकारी शासन है और सेवा नियमों के अनुसार इस स्तर की कार्रवाई शासन स्तर पर ही की जानी चाहिए। ऐसे में बालोद कलेक्टर द्वारा जारी आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर प्रतीत होता है और इसकी वैधानिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू करने सचिवों की कार्यशाला, घर-घर कचरा संग्रहण और स्वच्छता शुल्क पर जोर
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू करने सचिवों की कार्यशाला, घर-घर कचरा संग्रहण और स्वच्छता शुल्क पर जोर
June 23, 2026
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 लागू करने सचिवों की कार्यशाला, घर-घर कचरा संग्रहण और स्वच्छता शुल्क पर जोर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

फेडरेशन नेताओं ने आरोप लगाया कि बिना समुचित जांच, कारण बताओ नोटिस और पक्ष रखने का अवसर दिए सीधे निलंबन की कार्रवाई करना “प्राकृतिक न्याय” की मूल भावना के खिलाफ है। उनका कहना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था में गिरावट है तो उसके लिए केवल स्कूल प्रमुखों को दोषी ठहराना प्रशासनिक विफलताओं पर पर्दा डालने जैसा है।

बैठक में कई प्राचार्यों ने यह भी चिंता जताई कि इस प्रकार की कार्रवाई से पूरे शिक्षा विभाग में भय और असुरक्षा का माहौल बन रहा है। अधिकारियों के अनुसार यदि केवल रिजल्ट प्रतिशत के आधार पर निलंबन शुरू हुआ तो भविष्य में कोई भी अधिकारी कठिन क्षेत्रों में जिम्मेदारी लेने से बचेगा। इससे शिक्षा व्यवस्था सुधारने के बजाय और कमजोर हो सकती है।

ये खबर भी पढ़ें…
कैबिनेट के बड़े फैसले: ग्रामीण रोजगार, आजीविका और बायोगैस को बढ़ावा, 4000 करोड़ की नई योजना को मंजूरी
कैबिनेट के बड़े फैसले: ग्रामीण रोजगार, आजीविका और बायोगैस को बढ़ावा, 4000 करोड़ की नई योजना को मंजूरी
June 23, 2026
कैबिनेट के बड़े फैसले: ग्रामीण रोजगार, आजीविका और बायोगैस को बढ़ावा, 4000 करोड़ की नई योजना को मंजूरी रायपुर, 23...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

छत्तीसगढ़ प्राचार्य फेडरेशन ने मांग की है कि बालोद कलेक्टर द्वारा जारी निलंबन आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए तथा सभी निलंबित प्राचार्यों को सम्मानपूर्वक बहाल किया जाए। फेडरेशन ने यह भी घोषणा की है कि जल्द ही प्रतिनिधिमंडल शिक्षा मंत्री और विभागीय सचिव से मुलाकात कर इस कार्रवाई को रद्द करने की मांग करेगा।

फेडरेशन ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसमें सामूहिक विरोध, ज्ञापन, प्रदर्शन और आवश्यक हुआ तो कार्य बहिष्कार जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।

अब यह मामला केवल 8 प्राचार्यों के निलंबन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा हो गया है कि शिक्षा विभाग में जवाबदेही तय करने का तरीका क्या होगा—सुधार आधारित या दंड आधारित? प्रदेशभर के शिक्षकों और प्राचार्यों की नजर अब शासन के अगले कदम पर टिक गई है।

Back to top button
error: Content is protected !!