LIVE UPDATE
झमाझम खबरें

अपने संगठन पर अविश्वास, ठेकेदारों का मायाजाल और अमरबेलों का भाजपा प्रवेश बना मरवाही में सरोज पांडेय की हार का कारण -: महामंत्री अजय तिवारी

अपने संगठन पर अविश्वास, ठेकेदारों का मायाजाल और अमरबेलों का भाजपा प्रवेश बना मरवाही में सरोज पांडेय की हार का कारण -: महामंत्री अजय तिवारी

रायपुर/किसी व्यक्ति को नेता और पार्टी को विजेता बनाते हैं, उसके कार्यकर्ता ।
मरवाही के विषय में कहावत प्रचलित थी कि, लोकसभा चुनाव जीत जाते हैं, मगर विधानसभा में हार जाते हैं ।
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा लगभग 5500 वोट से मरवाही में पीछे थी, जबकि उसके पहले लगभग 50000 वोट से विधानसभा का चुनाव भाजपा हार गई थी ।

ये खबर भी पढ़ें…
पालक-बालक सम्मेलन में मिली मांग का त्वरित निराकरण, सीता और गीता बैगा को छात्रावास में मिला प्रवेश
पालक-बालक सम्मेलन में मिली मांग का त्वरित निराकरण, सीता और गीता बैगा को छात्रावास में मिला प्रवेश
August 11, 2026
पालक-बालक सम्मेलन में मिली मांग का त्वरित निराकरण, सीता और गीता बैगा को छात्रावास में मिला प्रवेश बेटियों की शिक्षा...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

इस बार विधानसभा चुनाव के त्रिकोणीय संघर्ष में भाजपा का विधायक बना, मगर लोकसभा में लगभग 18000 वोट से भाजपा पीछे हो गई ।

बढ़त ना सही, यदि ये 18000 वोट से मरवाही में गड्ढा ना होता, तो लोकसभा कोरबा का परिणाम भी कुछ और होता ।

ये खबर भी पढ़ें…
कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक आयोजित 
कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक आयोजित 
August 11, 2026
कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक आयोजित  गौरेला पेंड्रा मरवाही, 11अगस्त 2026/ जिला जल एवं...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

इस चुनाव में मरवाही से पीछे होने के बाद कुछ तथाकथित बहरूपियों द्वारा आज जिला जीपीएम और मरवाही के भाजपा संगठन पर दाग लगाने की कोशिश जरूर की जा रही है,
मगर हकीकत में कुछ तथ्य ऐसे भी हैं जिन पर यह दाग नहीं चिपकता ।

असल में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के समय भाजपा के पुरोधाओं ने जिस विचारधारा, नीति और सिद्धांतो को अंगीकार किया था..जिनके त्याग तपस्या और बलिदान की कहानी, हर बैठक-हर कार्यक्रम में सुना सुनाकर कार्यकर्ताओं को परिपक्व किया जाता है..उस परिपक्वता की मिसाल हैं जिला जीपीएम और मरवाही के भाजपा कार्यकर्ता ।

ये खबर भी पढ़ें…
बिलासपुर में विभागीय योजनाओं की समीक्षा, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने दिए सख्त निर्देश; छात्रवृत्ति से लेकर पीएम जनमन और एकलव्य विद्यालयों तक की प्रगति परखी
बिलासपुर में विभागीय योजनाओं की समीक्षा, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने दिए सख्त निर्देश; छात्रवृत्ति से लेकर पीएम जनमन और एकलव्य विद्यालयों तक की प्रगति परखी
August 11, 2026
बिलासपुर में विभागीय योजनाओं की समीक्षा, प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने दिए सख्त निर्देश; छात्रवृत्ति से लेकर पीएम जनमन और...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

सन 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद जिस आतंक और हाहाकार के विषय पर 2003 में भाजपा की सरकार बनी, उस आतंक और हाहाकार को सबसे ज्यादा मरवाही के भाजपा कार्यकर्ताओं ने सहा, क्योंकि मरवाही से ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे ।
उसके बाद तीन बार की भाजपा सरकार में भी मरवाही के कार्यकर्ता प्रताड़ित होते रहे, क्योंकि मरवाही से भाजपा का विधायक नहीं था ।

उसके बाद सरकार कांग्रेस की बनी, तब भी विधायक ना होने के कारण भाजपा कार्यकर्ता कुचले गए ।
महत्वपूर्ण बात यह है कि संघर्ष करने की बजाय उन भाजपा कार्यकर्ताओं के पास विकल्प था..कि सत्ता पक्ष या प्रभावी नेता के साथ जुड़ जाएं और प्रताड़ित होने से बच जाएं ।
मगर मरवाही के कार्यकर्ताओं ने सूखी रोटी खाकर मारपीट, थाना, पुलिस, अदालत, साजिश, षड्यंत्र को झेलना स्वीकार किया और भाजपा का झंडा थामे अपनी पार्टी को मजबूत बनाने में लगे रहे । ऐसे होते हैं भाजपा के कार्यकर्ता ।

इसके विपरीत, जिन लोगों को तात्कालिक लाभ, अवैध वसूली, दलाली, ठेकेदारी, पुराने पापों से बचना होता है, वो किसी के नहीं होते..जिधर मजबूती देखते हैं, अमरबेल की तरह उधर चिपक जाते हैं ।
भाजपा के कुछ ठेकेदार चापलूसों ने, प्रत्याशी और उनकी टीम को गुमराह करते हुए पूरे विधानसभा से छजका का वोट दिलाने का सपना दिखाकर अमरबेलों को शामिल करा लिया, यहीं पर धोखा खा गईं सरोज पांडेय ।

*भाजपा के मंडल महामंत्री अजय तिवारी* से बात करने पर उन्होंने, भाजपा संगठन के विरुद्ध एक समानांतर टीम का खड़ा होना, साथ ही योग्य और संघर्षशील कार्यकर्ताओं से हटकर..चापलूस ठेकेदारों और नवप्रवेशी अमरबेलों के घेरे में बनने वाली चुनावी रणनीति को हार का प्रमुख कारण बताया ।

एक ओर *जिनके खिलाफ* सालों से संघर्ष करते हुए भाजपाइयों ने अपने क्षेत्र में अपनी पार्टी को मजबूत किया, अपना कैडर वोट बचा के रखा और इसी जिला संगठन के नेतृत्व में अपना विधायक बनाया..
भाजपा कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने वाले और आमजनमानस में अपनी छवि धूमिल कर चुके लोगों को हड़बड़ाहट में भाजपा प्रवेश करा देने से, पूरे विधानसभा के भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश गया और कार्यकर्ता हतोत्साहित महसूस किए ।

दूसरी तरफ नवप्रवेशियों ने अपना नंबर बढ़ाने के लिए ऐसा मायाजाल बिछाया, कि उसमें प्रत्याशी की समानांतर टीम फंस गई और अपने पार्टी संगठन से दूरी बनाते हुए लगभग चुनाव का संचालन ही बहरूपियों को सौंप दिया गया ।

जिन नवप्रवेशियों ने निर्दलीय प्रत्याशियों को बैठाने के नाम पर, जोगी कांग्रेस का वोट दिलाने के नाम पर, और पूरा विधानसभा मरवाही जिताने के नाम पर संसाधनों का भरपूर आनंद लिया,
वही लोग जब परिणाम सामने आया, तो पता लगा कि वे तो अपनी पुरानी पार्टी से वफ़ा निभाते हुए दोनों तरफ से खेल रहे थे ।
जिसका प्रमाण है कि विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिले वोट के बाद लोकसभा में, भाजपा कार्यकर्ताओं की मेहनत और राज्य सरकार की योजनाओं की बदौलत भाजपा 8000 वोट बढ़ाने में सफल रही ।
मगर, छजका और कांग्रेस के वोट दिलाने का सपना दिखाकर मजा उड़ाने वाले पूरे चुनाव के दौरान रोड में गाड़ी दौड़ा दौड़ाकर सिर्फ भाजपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की शिकायत करते रहे..और खुद विपक्षी पार्टी से मिलकर भीतरघात करते हुए अपने राजनीतिक खून का असर दिखा दिए ।

जब जमीनी स्तर से संघर्ष करके राष्ट्रीय स्तर की नेत्री बनी सरोज पांडेय चापलूस और दलालों के षड्यंत्र को भांप नहीं सकीं, तो उनके प्रतिनिधि बन के आए दुर्ग और भिलाई के लोग, भला अनजाने में अमरबेलों के चंगुल में फंसने से कैसे बच पाते..

हालाकि ये इस क्षेत्र में पहली बार नहीं हुआ, इससे पहले इस जिले के विधानसभा चुनाव में भी कोटा प्रत्याशी को इसी तरह घेरकर निपटाया जा चुका है ।

कहीं ना कहीं जिला जीपीएम में ठेकेदारों की एक ऐसी लॉबी बन रही है, जो भाजपा में शामिल होकर भाजपा को काटने का काम करती है.. जिसमें ऐसे लोग हैं जिनको संगठन कार्य से कोई मतलब नहीं होता, ये सिर्फ मौके मौके पर अपनी एक टीम बनाकर भाजपा को हराने और संगठन को खतम करने का कार्य करते हैं ।

सच्चाई यह भी है कि, समय रहते कार्यकर्ताओं की आवाज सुन ली जाती, तो लोकसभा कोरबा का परिणाम भी भाजपा के पक्ष में होता ।
मगर अपने ही संगठन के कार्यकर्ताओं पर अविश्वास कर, कुछ ठेकेदार भाजपाइयों के मायाजाल में फंसकर, कांग्रेस और छजका वाले अमरबेलों का भाजपा प्रवेश ही प्रमुख कारण बना, जो मरवाही का विधानसभा चुनाव जिताने वाले कार्यकर्ता, लोकसभा में पीछे हो गए ।

Back to top button
error: Content is protected !!