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कोरबा : वन विभाग की ढिलाई या संरक्षण? जंगलों में राजस्थानी भेड़-बकरियों का धावा, विभागीय संरक्षण पर उठे सवाल।

मिथलेश आयम, कोरबा, जटगा : जिले के जटगा व पसान वनपरिक्षेत्र के घने जंगल इन दिनों राजस्थानी भेड़-बकरियों के बड़े झुंडों की चराई का केंद्र बने हुए हैं। दूर-दराज से आए चरवाहे अपने हजारों की संख्या में भेड़-बकरियों को लेकर यहाँ डेरा डाले हुए हैं। पूरा मामला ग्राम धवलपुर के बंधवापारा, करीघाट सागौन प्लांट का है जहाँ इन झुंडों की लगातार आवाजाही और चराई से न केवल प्राकृतिक वनस्पति प्रभावित हो रही है, बल्कि नन्हे पेंड़-पौधो पर भी संकट मंडराने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय संरक्षण और अनदेखी के चलते चरवाहों के हौसले बुलंद हैं। आए दिन जंगलों में पेड़-पौधों और खेती को नुकसान और मिट्टी कटाव की स्थिति देखने को मिल रही है। बावजूद वन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है।जंगलों के लिए खतरा :- 

 “राजस्थानी भेड़-बकरियाँ जिस तरह बड़े पैमाने पर पत्तियाँ और घास चरती हैं, उससे नए पौधों की वृद्धि रुक जाती है और धीरे-धीरे जंगल का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है,” ग्रामीणों ने चिंता जताई ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के मौन संरक्षण से चरवाहे निर्भीक होकर जंगलों में डेरा डाल रहे हैं। वहीं, स्थानीय वन्यजीवों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है क्योंकि प्राकृतिक चारा भेड़-बकरियों द्वारा नष्ट किया जा रहा है। प्रतिवर्ष रहता है डेरा बीते कुछ सालों से राजस्थान से आने वाले ऊंट और भेड़ वालों यहां जमे हुए है। पसान, जटगा, अंचलों में भेड़ वालों के चलते वनों और

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वनस्पतियों को काफी नुकसान हो रहा है। वनवासी अंचलों में जहां तहां उनके डेरे दिखाई देने लगे है। एक-एक डेरे में हजारों की संख्या में भेड़ रहती है। वनवासियों के अनुसार जिन स्थानों पर इनके डेरे ठहरते हैं और भेड़ बैठती है वहां घास तक नहीं उगता है। दूसरी ओर भेड़ों को खिलाने के लिए उनके चरवाहे जंगल के झाड़ों को काट देते हैं इससे जंगलों में झाड़ों के ठूंठ दिखाई देने लगे हैं।

जटगा रेंज के सागौन प्लाट में डाला डेरा :- 

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पसान परिक्षेत्र की हरियाली ख़त्म करने के बाद, अब जटगा रेज में प्रवेश करते हुए वहां के सागौन प्लाट में डेरा डाल रखे हैं, वन विभाग थोड़ी सी मलाई के चक्कर मे जंगलों की हरियाली ख़त्म करने पर तुली हुई है।

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