रतनपुर का ‘भ्रष्ट सिंडिकेट’ बिट गार्ड दीपक यादव और डिप्टी रेंजर समीम खान बने माफियाओं के आका काला साम्राज्य का खेल, कुंभकर्णी नींद में लीन उच्च अधिकारी।

जीशान अंसारी, बिलासपुर/रतनपुर :- बिलासपुर वनमण्डल का रतनपुर वन परिक्षेत्र इन दिनों लकड़ी माफियाओं की ‘चारागाह’ बन चुका है। यहाँ बेशकीमती इमारती पेड़ों की अंधाधुंध बलि चढ़ाई जा रही है। हैरत की बात यह है कि यह हरा-भरा जंगल किसी बाहरी तस्कर से नहीं, बल्कि वन विभाग के उन भ्रष्ट नुमाइंदों से कट रहा है, जिन्हें इसे बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। विभागीय संरक्षण में लकड़ी माफियाओं का काला साम्राज्य इस कदर फल-फूल रहा है कि अब जंगल के अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगा है।
वर्दी वाले की संरक्षण ‘लकड़हारे’ बने आका :-
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि परसापानी बीट और छातौना बीट में कुल्हाड़ियों की गूंज बीट गार्ड दीपक यादव और डिप्टी रेंजर समीम खान की शह पर सुनाई दे रही है। रक्षक की वर्दी पहनकर ये दोनों अधिकारी भक्षक की भूमिका निभा रहे हैं। इन ‘दो मूर्तियों’ के अघोषित आशीर्वाद से जंगल दिन-दहाड़े साफ हो रहे हैं और माफिया बेखौफ होकर अपना काम कर रहे हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि बिना मैदानी अमले की मिलीभगत के एक पत्ता भी जंगल से बाहर नहीं जा सकता, यहाँ तो पेड़ों के पेड़ गायब हो रहे हैं।
ऊपर तक पहुँच रहा है ‘कमीशन’ का हिस्सा? :-
इस पूरे खेल में सबसे शर्मनाक पहलू वन महकमे के उच्चाधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी है। जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर वन मंडलाधिकारी (DFO) और वन परिक्षेत्र अधिकारी रतनपुर को इस पूरे सिंडिकेट और अवैध कटाई की पुख्ता जानकारी है। बावजूद इसके, न तो कोई विभागीय जाँच बैठाई गई और न ही किसी पर कोई ठोस कार्यवाही हुई। सूत्रों की मानें तो अधिकारियों का यह मौन अज्ञानता का नहीं, बल्कि ‘मोटी कमीशन’ का है। वन परिक्षेत्र अधिकारी ने इन भ्रष्ट कर्मचारियों पर पूरी तरह से अपनी मेहरबानी दिखा रखी है। जब ऊपर से लेकर नीचे तक सबकी जेबें गर्म हो रही हों, तो कार्यवाही की जहमत कौन उठाए? इसी विभागीय ढील और संरक्षण ने दोनों कर्मचारियों और लकड़ी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि उन्हें अब किसी का खौफ नहीं रहा।
क्या CCF तोड़ेंगे यह भ्रष्ट सिंडिकेट :-

जंगल की इस खुली लूट और विभागीय बंदरबांट के बाद अब सबकी निगाहें मुख्य वन संरक्षक (CCF) पर टिक गई हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या CCF इस मामले में कड़ा संज्ञान लेकर जंगल निगलने वाले इन ‘रक्षकों’ पर कोई गाज गिराते हैं, या फिर यह मामला भी कमीशन की भेंट चढ़कर विभागीय फाइलों में हमेशा के लिए दफन हो जाएगा












