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घोटाला: “3 दिन में कार्रवाई करो, नहीं तो ताला–चक्का जाम”—सरपंच-सचिव संघ का सीधा अल्टीमेटम

घोटाला: “3 दिन में कार्रवाई करो, नहीं तो ताला–चक्का जाम”—सरपंच-सचिव संघ का सीधा अल्टीमेटम

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।जनपद पंचायत गौरेला में 15वें वित्त आयोग की राशि में कथित करोड़ों रुपये के OTP घोटाले को लेकर अब मामला तूल पकड़ चुका है। लंबे समय से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से नाराज सरपंच संघ और सचिव संघ ने संयुक्त रूप से आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।जिलेभर के सैकड़ों सरपंच और सचिव रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे, जहां तहसीलदार गौरेला को 7 बिंदुओं का विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविक दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।

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पंचायत प्रतिनिधियों को बनाया जा रहा बलि का बकरा

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संघ ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत स्तर के सरपंच और सचिवों को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है, जबकि भुगतान प्रक्रिया, तकनीकी नियंत्रण और वित्तीय संचालन पूरी तरह जनपद स्तर से संचालित होता है।संघ का कहना है कि पंचायत प्रतिनिधियों को न तो तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया और न ही उन्हें ऑनलाइन भुगतान प्रक्रिया की समुचित जानकारी दी गई, जिससे वे इस सिस्टम पर पूरी तरह निर्भर रहे।

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OTP के जरिए हुआ खेल, ऑपरेटर की भूमिका संदिग्ध

ज्ञापन में सबसे गंभीर आरोप यह लगाया गया है कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल में सरपंच और सचिवों के मोबाइल नंबर की जगह कंप्यूटर ऑपरेटर का मोबाइल नंबर दर्ज कर दिया गया था।इसके चलते सभी भुगतान से जुड़े OTP सीधे ऑपरेटर को प्राप्त होते रहे। संघ का दावा है कि इसी का फायदा उठाकर कथित रूप से बिना पंचायत प्रतिनिधियों की जानकारी और अनुमति के बड़े पैमाने पर भुगतान किए गए।

बिना काम और सप्लाई के करोड़ों का भुगतान

संघ ने आरोप लगाया है कि कई मामलों में बिना किसी सामग्री आपूर्ति या कार्य के ही वेंडरों को लाखों-करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया।चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक न तो किसी प्रकार की एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी, ऑपरेटर या वेंडर के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई है।

DSC अप्रूवल पर भी खड़े हुए सवाल

डिजिटल सिग्नेचर (DSC) की प्रक्रिया को लेकर भी संघ ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि डीएससी का अप्रूवल जनपद स्तर पर अधिकारियों द्वारा किया जाता है, इसके बावजूद अन्य पंचायतों के डीएससी से भुगतान होना पूरे सिस्टम की पारदर्शिता और सुरक्षा पर सवाल खड़ा करता है।

8 पंचायतों के खाते सील, विकास कार्य ठप

मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने 8 ग्राम पंचायतों के बैंक खातों को सील कर दिया है। इससे विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं।संघ ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि वास्तविक दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय निर्दोष पंचायतों को दंडित किया जा रहा है, जिससे आम जनता भी प्रभावित हो रही है।

एक साल बाद भी नहीं हुई कार्रवाई संघ का कहना है कि इस पूरे मामले को लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन जिला पंचायत प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई है।इससे यह संदेह गहरा रहा है कि कहीं जिम्मेदार अधिकारियों, ऑपरेटर और वेंडरों को बचाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा।

3 दिन का अल्टीमेटम, उग्र आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि 3 दिनों के भीतर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई और पंचायतों के खाते बहाल नहीं किए गए, तो 26 मार्च 2026 से जिले के सभी सरपंच और सचिव अनिश्चितकालीन “काम बंद-कलम बंद” हड़ताल पर चले जाएंगे।संघ ने स्पष्ट कहा है कि इस स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।चरणबद्ध आंदोलन की पूरी रणनीति तैयार

संघ ने आगे के आंदोलन की रूपरेखा भी घोषित कर दी है—

30 मार्च 2026: जनपद पंचायत गौरेला में ताला बंदी 31 मार्च 2026: सेमरा तिराहा में चक्का जाम संघ ने कहा है कि जब तक निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों—तत्कालीन अधिकारी, संबंधित ऑपरेटर और वेंडर—पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप

जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष लालचंद सोनवानी ने कहा कि पूरी कार्रवाई विधि के विरुद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी—वेंडर, कंप्यूटर ऑपरेटर और तत्कालीन सीईओ—अब तक कार्रवाई से बाहर हैं, जबकि निर्दोष सचिवों को निलंबित कर दिया गया है।वहीं सचिव संघ के जिला अध्यक्ष किशन राठौर ने कहा कि कुछ ऐसे सचिवों पर भी कार्रवाई की गई है, जो उस समय संबंधित पंचायतों में पदस्थ ही नहीं थे। इससे साफ है कि बिना निष्पक्ष जांच के कार्रवाई की गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तत्कालीन सीईओ को बचाने के लिए पूरी कहानी गढ़ी जा रही है।

प्रदर्शन में उमड़ा जनसैलाब

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में सरपंच और सचिव मौजूद रहे। सभी ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस अल्टीमेटम पर क्या रुख अपनाता है और क्या इस बहुचर्चित मामले में निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं।

तहसीलदार गौरेला ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए कहा कि सरपंच-सचिव संघ द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने बताया कि प्राप्त ज्ञापन को जांच हेतु उच्च कार्यालय को प्रेषित किया जाएगा।उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि पूरे मामले में नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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