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PMGSY सड़क में पेंच रिपेयर या‘थूक पॉलिश’, एक माह में ही उजागर हुआ सिस्टम की पोल ?

PMGSY सड़क में पेंच रिपेयर या‘थूक पॉलिश’, एक माह में ही उजागर हुआ सिस्टम की पोल ?

गौरेला–पेंड्रा–मरवाही।प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत मरवाही–सेखवा कुम्हारटोला से मटियाडाँड़ तक बनी 1.65 किलोमीटर लंबी सड़क पर किया गया पेंच रिपेयर कार्य अब सवालों के घेरे में आ चुका है। महज एक माह के भीतर सड़क की हालत यह बताने के लिए काफी है कि मरम्मत कार्य गुणवत्ता सुधार नहीं, बल्कि खानापूर्ति था।

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सड़क पर कई स्थानों पर पुराने गड्ढे जस के तस बने हुए हैं, वहीं जिन जगहों पर रिपेयर दिखाया गया था, वहां गिट्टियां बाहर आ चुकी हैं और सतह उखड़ गई है। जानकारों के अनुसार यह स्थिति साफ़ इशारा करती है कि गड्ढों की सफाई, लेवलिंग और मानक मटेरियल का उपयोग नहीं किया गया।
तकनीकी प्रक्रिया को जानबूझकर किया गया नजरअंदाज

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि पेंच रिपेयर के दौरान न तो सड़क की तकनीकी तैयारी की गई, न ही PMGSY के तय मानकों का पालन हुआ। मरम्मत सिर्फ दिखावे के लिए की गई, ताकि कागजों में चमक, जमीनी हकीकत खोखला?

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विभागीय निगरानी पर बड़ा सवाल। ?

सबसे गंभीर सवाल विभागीय निगरानी को लेकर उठ रहा है। ग्रामीणों और सूत्रों का दावा है कि कार्य के दौरान न तो विभागीय इंजीनियर और न ही SDO ने स्थल पर नियमित निरीक्षण किया। इससे यह आशंका गहराती है कि ठेकेदार और विभागीय अमले के बीच गठजोड़ के चलते थूक पालिस परत कार्य को भी मंजूरी दे दी जाती है?

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‘विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कहते है _डामर खत्म हो गया था’—जवाब नहीं, बहाना

जब सड़क की बदहाली पर सवाल उठाए गए, तो अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि “डामर खत्म हो गया था।”
लेकिन जनता पूछ रही है—

अन्य जगहों पर हुए पेंच रिपेयर का यही हाल हैं

अगर डामर उपलब्ध नहीं था तो काम रोकने के बजाय अधूरा और घटिया काम क्यों कराया गया ? और जिन स्थानों पर डामर डाला गया, वहां भी सड़क एक माह में ही क्यों उखड़ गई ? ठेकेदार का नाम चर्चा में स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले को मेसर्स दहंगल बिल्डर्स, गौरेला द्वारा किए गए कार्य और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से जोड़कर देखा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क विकास का उदाहरण नहीं, बल्कि सरकारी योजना के दुरुपयोग की मिसाल बन चुकी है।

PMGSY जैसी योजना का उद्देश्य गांवों को बेहतर सड़क देना है, लेकिन यहां तस्वीर उलट है।

सवाल साफ है—यह कार्य विकास का प्रतीक है या फिर ठेकेदार–विभागीय गठजोड़ द्वारा जनता के भरोसे के साथ किया गया खिलवाड़ ?

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