
सरकारी स्कूल में बच्चों से लगवाई जा रही झाड़ू! चपरासी गायब, शिक्षा विभाग मौन—मासूमों से सफाई कराना किसका आदेश?
बेलगहना के बैगापारा प्राथमिक स्कूल का मामला, BEO ने फोन तक नहीं उठाया; शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल।

जीशान अंसारी की रिपोर्ट बिलासपुर/कोटा-बेलगहना। बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला बैगापारा (लुफा) से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। यहां मासूम बच्चों के हाथों में किताबें नहीं, बल्कि झाड़ू थमा दी गई। विद्यालय परिसर और कक्षाओं की साफ-सफाई बच्चों से कराई जा रही थी। जब बच्चों से पूछा गया कि वे झाड़ू क्यों लगा रहे हैं, तो उनका सीधा जवाब था—”चपरासी नहीं आया है, इसलिए हम लोग सफाई कर रहे हैं।”मौके पर ली गई तस्वीरों में बच्चे कक्षा के अंदर झाड़ू लगाते स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। सवाल यह है कि यदि स्कूल में सफाई कर्मचारी की व्यवस्था है, तो बच्चों से यह काम क्यों कराया जा रहा है? क्या शिक्षा विभाग अब बच्चों को पढ़ाई की जगह सफाई का प्रशिक्षण दे रहा है?
विद्यालय को ज्ञान का मंदिर कहा जाता है, जहां बच्चों के भविष्य का निर्माण होना चाहिए। लेकिन बैगापारा स्कूल की तस्वीरें शिक्षा व्यवस्था की लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता की पोल खोल रही हैं। बच्चों से झाड़ू लगवाना उनकी गरिमा और शिक्षा के अधिकार पर भी सवाल खड़ा करता है। मामले पर पक्ष जानने के लिए ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) गोपाल दुबे से कई बार दूरभाष पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव करना तक जरूरी नहीं समझा। जिम्मेदार अधिकारी की यह चुप्पी पूरे मामले को और गंभीर बना रही है। अब सवाल उठ रहे हैं— क्या स्कूल में नियुक्त चपरासी नियमित रूप से ड्यूटी कर रहा है? यदि चपरासी अनुपस्थित था, तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या बच्चों से झाड़ू लगवाना शिक्षा विभाग के नियमों के अनुरूप है?

इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
क्षेत्र के अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों का समय पढ़ाई में लगना चाहिए, न कि विद्यालय की सफाई में। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस गंभीर मामले में कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
















