LIVE UPDATE
झमाझम खबरेंदुनियादेशराजनीतीरायपुर

आंबेडकर जयंती: विचारों से रोशन हुआ समाज – नारायण चौधरी

आंबेडकर जयंती: विचारों से रोशन हुआ समाज
नारायण चौधरी

समाज कार्य विभाग
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक, मध्य प्रदेश – 484887

ये खबर भी पढ़ें…
संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प: समरसता भोज में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय
संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प: समरसता भोज में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय
April 14, 2026
संविधान के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प: समरसता भोज में शामिल हुए मुख्यमंत्री श्री साय संविधान हमारे लोकतंत्र...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

भारतवर्ष जैसे महान देश के निर्माणकर्ताओं में से एक डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म आज से 135 वर्ष पूर्व 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। उनके उल्लेखनीय कार्य आज भी सभी के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं। परम श्रद्धेय बाबा साहेब ने अत्यंत साधारण पृष्ठभूमि से उठकर गरीबी और जाति आधारित भेदभाव का सामना करते हुए एक अर्थशास्त्री, न्यायविद, विद्वान और राजनीतिज्ञ के साथ-साथ संविधान निर्माता के रूप में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। एक समाज सुधारक के रूप में उन्होंने दलितों और अन्य पिछड़े वर्गों तथा महिलाओं के लिए आजीवन संघर्ष किया और उन्हें न्याय दिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। वे ऐसे भारत का सपना देखते थे जहाँ जातिवाद और छुआछूत से रहित समाज हो तथा सभी को समान न्याय और अधिकार प्राप्त हों। उनका दृष्टिकोण स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की भावना पर आधारित था।
परंतु आज के वर्तमान समय में यह स्थिति देखने को मिलती है कि सभी को समान शिक्षा, रोजगार और चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। समाज में जाति और धर्म के नाम पर लड़ाई-झगड़े तथा तनाव उत्पन्न हो जाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि पढ़े-लिखे शिक्षित लोग भी छुआछूत और अलगाव की भावना को अपनाए हुए हैं। समाज में ऊँच-नीच की भावना पैदा की जा रही है और लोग समाज को जातियों में बाँटकर एक जाति को श्रेष्ठ तथा दूसरी को निम्न समझते हैं। हमें इन आडंबरों और गलत प्रवृत्तियों से ऊपर उठना होगा, तभी हम बाबा साहेब के सपनों का भारत बना सकते हैं।
स्वतंत्र भारत के संविधान का मसौदा तैयार करने में बाबा साहेब ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने संविधान के माध्यम से राष्ट्र और सरकार की नींव में लोकतांत्रिक मूल्यों को स्थापित किया। संविधान सभा में मसौदा प्रस्तुत करते समय उन्होंने कहा था कि संविधान कितना भी अच्छा क्यों न हो, वह तब तक अच्छा साबित नहीं होगा जब तक उसे लागू करने वाले लोग अच्छे नहीं होंगे। यदि संविधान में कुछ कमियाँ भी हों, लेकिन उसे चलाने वाले लोग योग्य हों, तो वह सफल सिद्ध होगा।
संविधान सभा की मसौदा समिति के अध्यक्ष के रूप में डॉ. आंबेडकर का आचरण इस सिद्धांत का उदाहरण है। उन्होंने बहसों में विभिन्न विचारों को सुना, असहमति को स्वीकार किया, अपने सिद्धांतों का बचाव किया और आवश्यकता पड़ने पर अपने विचारों में परिवर्तन भी किया। अपने अंतिम भाषण में उन्होंने वैचारिक विरोधियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और समिति के अन्य सदस्यों के साथ श्रेय साझा किया। आज हमें उनके विचारों से प्रेरणा लेकर मतभेदों के बावजूद उद्देश्यों की एकता बनाए रखने की आवश्यकता है। भाईचारे की भावना राष्ट्र की नींव है। बाबा साहेब भारतीयों के बीच भाईचारे को मजबूत करने के पक्षधर थे। उनका मानना था कि भाईचारे के बिना समानता और स्वतंत्रता टिक नहीं सकती। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जाति व्यवस्था राष्ट्र विरोधी है क्योंकि यह अलगाव, ईर्ष्या और घृणा उत्पन्न करती है तथा भारतीयों को विभाजित करती है। आज वास्तविक राष्ट्र-विरोधी प्रवृत्तियाँ वे हैं जो धर्म, भाषा और लिंग के आधार पर समाज को बाँटने का प्रयास करती हैं। इसके बावजूद भारतीय समाज में भाईचारे की भावना मजबूत है। करोड़ों भारतीयों ने समय-समय पर सामाजिक विभाजन के खिलाफ आवाज उठाई है। इस भावना को पोषित करने और अपने घरों, समुदायों और संगठनों में इसे मजबूत करने की आवश्यकता है। शिक्षा के क्षेत्र में डॉ. भीमराव आंबेडकर का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी उच्च शिक्षा प्राप्त की और अनेक डिग्रियाँ अर्जित कीं। बचपन में उन्हें पाठशाला में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती थी, इसलिए वे दरवाजे के बाहर बैठकर शिक्षा ग्रहण करते थे। पानी पीने के लिए भी उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता था। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शिक्षा प्राप्त की और उच्च अध्ययन के लिए विदेश गए।
उनका मानना था कि शिक्षा समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम है। यही कारण है कि उन्होंने जीवन भर शिक्षा के प्रसार पर जोर दिया और संदेश दिया— शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो ! आंबेडकर न केवल शोषित और पीड़ित वर्गों के बल्कि पूरे समाज के हित में सोचने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने समरसता, शिक्षा, नारी सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय पर बल दिया। उन्होंने श्रमिकों के अधिकारों के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किए, जैसे— कार्य के घंटे निर्धारित करना, श्रमिकों के लिए सुरक्षा, छुट्टी और वेतन संबंधी प्रावधान।
युवा वर्ग के लिए बाबा साहेब का जीवन संघर्ष, शिक्षा और आत्मसम्मान का प्रतीक है। वे सिखाते हैं कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और मेहनत से सफलता प्राप्त की जा सकती है। आज का युवा वर्ग यदि उनके आदर्शों को अपनाए, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
14 अप्रैल को मनाई जाने वाली आंबेडकर जयंती केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि समानता, न्याय और अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी है। यह दिन हमें प्रेरणा देता है कि हम शिक्षा को अपनाएँ, सामाजिक समरसता को बढ़ाएँ और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण में योगदान दें।
निष्कर्ष
आंबेडकर जयंती के अवसर पर पूरा देश बाबा साहेब को नमन करते हुए उनके विचारों को अपनाने का संकल्प लेता है। उनका जीवन और कार्य आज भी हमें एक बेहतर, समानतापूर्ण और न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की दिशा में मार्गदर्शन देता है।

ये खबर भी पढ़ें…
भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक एकता का भव्य संगम: मरवाही में संत शिरोमणि श्री सेन जी महाराज की 726वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई
भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक एकता का भव्य संगम: मरवाही में संत शिरोमणि श्री सेन जी महाराज की 726वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई
April 14, 2026
भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक एकता का भव्य संगम: मरवाही में संत शिरोमणि श्री सेन जी महाराज की 726वीं जयंती धूमधाम...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

Back to top button
error: Content is protected !!