LIVE UPDATE
झमाझम खबरेंट्रेंडिंगदुनियादेशप्रदेशराजनीतीरायपुर

छुट्टियां सिर्फ कागजों पर: समर कैंप और प्रशिक्षण के बोझ तले दबे शिक्षक-बच्चे, सुकून हुआ गायब

छुट्टियां सिर्फ कागजों पर: समर कैंप और प्रशिक्षण के बोझ तले दबे शिक्षक-बच्चे, सुकून हुआ गायब

राजनांदगांव।शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के नाम पर सरकार और प्रशासन द्वारा लगातार नए-नए प्रयोग किए जा रहे हैं, लेकिन इन प्रयोगों का सबसे बड़ा खामियाजा अब शिक्षक और विद्यार्थी दोनों को भुगतना पड़ रहा है। कभी मानसिक ताजगी और आत्मविकास का जरिया मानी जाने वाली छुट्टियां अब महज औपचारिकता बनकर रह गई हैं। ग्रीष्मकालीन अवकाश, जो पहले करीब 60 दिनों का हुआ करता था, अब सिमटकर 45 दिनों तक सीमित हो गया है, वहीं अन्य छुट्टियों में भी लगातार कटौती की जा रही है।

ये खबर भी पढ़ें…
मुसियारी स्कूल में कक्षा 3 की बच्ची से कथित मारपीट, कान पकड़कर उठाने का आरोप*
मुसियारी स्कूल में कक्षा 3 की बच्ची से कथित मारपीट, कान पकड़कर उठाने का आरोप*
September 25, 2026
*मुसियारी स्कूल में कक्षा 3 की बच्ची से कथित मारपीट, कान पकड़कर उठाने का आरोप* *जीशान अंसारी की कलम से*...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

स्थिति यह है कि इस सीमित अवकाश में भी शिक्षकों को समर कैंप, प्रशिक्षण, जनगणना, सर्वे और विशेष कोचिंग क्लास के नाम पर स्कूलों में बुलाने की तैयारियां की जा रही हैं। इससे न सिर्फ शिक्षकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों का स्वाभाविक बचपन भी छिनता नजर आ रहा है।

शिक्षा जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार मानसिक श्रम के बाद विश्राम बेहद जरूरी होता है। यह समय शिक्षक और विद्यार्थियों दोनों के लिए मानसिक पुनर्निर्माण का अवसर होता है। शिक्षक इस दौरान नए सत्र की तैयारी, विषयगत अध्ययन और स्वयं को अपडेट करने का कार्य करते हैं, वहीं बच्चे सामाजिक गतिविधियों, खेलकूद और अपनी रुचियों को विकसित करने में समय बिताते हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
पहले से बना था शौचालय, फिर भी मिली नई स्वीकृति! विभाग ने कसा शिकंजा
पहले से बना था शौचालय, फिर भी मिली नई स्वीकृति! विभाग ने कसा शिकंजा
September 25, 2026
पहले से बना था शौचालय, फिर भी मिली नई स्वीकृति! विभाग ने कसा शिकंजा भ्रामक जानकारी देकर नवीन शौचालय की...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

लेकिन वर्तमान परिदृश्य में यह संतुलन पूरी तरह बिगड़ चुका है। भीषण गर्मी में, जब तापमान 45 से 50 डिग्री तक पहुंच जाता है, तब बच्चों को स्कूल बुलाकर समर कैंप आयोजित करना केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। शिक्षकों का कहना है कि यह कदम न तो व्यावहारिक है और न ही बच्चों के हित में।

शिक्षकों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें एक “वोकेशनल कर्मचारी” की तरह देखा जाता है, जबकि अन्य शासकीय कर्मचारियों की तरह उन्हें 30 दिनों का अर्जित अवकाश भी उपलब्ध नहीं कराया जाता। लगातार बिना पर्याप्त विश्राम के काम करने से शिक्षकों में मानसिक थकान (बर्नआउट) बढ़ रही है, जिसका सीधा असर उनके शिक्षण स्तर पर पड़ता है।

ये खबर भी पढ़ें…
भारी बारिश के बीच 26 सितंबर को स्कूलों में अवकाश, कलेक्टर विजय दया राम के.ने दिए सख्त निर्देश
भारी बारिश के बीच 26 सितंबर को स्कूलों में अवकाश, कलेक्टर विजय दया राम के.ने दिए सख्त निर्देश
September 26, 2026
भारी बारिश के बीच 26 सितंबर को स्कूलों में अवकाश, कलेक्टर विजय दया राम के.ने दिए सख्त निर्देश गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

वहीं अभिभावकों की भी चिंता कम नहीं है। उनका कहना है कि बच्चों को छुट्टियों में खुलकर जीने, रिश्तेदारों से मिलने और खेलकूद के अवसर मिलने चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में बच्चे इन सभी अनुभवों से वंचित होते जा रहे हैं।

शिक्षकों की मांग है कि या तो पूर्व की तरह 60 दिनों का ग्रीष्मकालीन अवकाश बहाल किया जाए, या फिर अन्य कर्मचारियों की तर्ज पर उन्हें भी 30 दिनों का अर्जित अवकाश प्रदान किया जाए, ताकि वे अपनी आवश्यकता अनुसार विश्राम और कार्य संतुलन बना सकें। साथ ही उन्हें पूर्णकालिक गैर-वोकेशनल कर्मचारी घोषित करने की भी मांग उठ रही है।

अब सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग इन जायज मांगों पर ध्यान देगा या फिर प्रयोगों के नाम पर शिक्षकों और विद्यार्थियों पर इसी तरह अतिरिक्त बोझ डालता रहेगा। यदि समय रहते इस दिशा में संतुलित निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ी की शिक्षा और मानसिक विकास पर पड़ना तय

Back to top button
error: Content is protected !!