LIVE UPDATE
झमाझम खबरेंट्रेंडिंगप्रदेशराजनीतीरायपुर

​बिलासपुर : रेलवे की मनमानी, बिना अनुमति वन भूमि पर बना दी सड़क, 2005 के हजारों पौधे गायब जिम्मेदार कौन..?

जीशान अंसारी, बेलगहना/बिलासपुर : एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकारें करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही हैं, वहीं दूसरी ओर बिलासपुर जिले के बेलगहना क्षेत्र से रेलवे की बड़ी मनमानी और वन विकास निगम लिमिटेड की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। रेलवे द्वारा बिना किसी पूर्व अनुमति और सूचना के वन विकास निगम के कंपार्टमेंट क्रमांक P-997 एवं 995 की भूमि पर जेसीबी मशीनों से खुदाई कर, सड़क चौड़ीकरण और मुरूम-बोल्डर बिछाकर एक वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कर दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि इस पूरे निर्माण के दौरान संबंधित विभाग पूरी तरह बेखबर रहा।

​पुलिस को बताया, वन विभाग से छिपाया :-      प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, रेलवे के LHS-29 (तुलुफ अंडरब्रिज) में आगामी 8 जून से 23 जुलाई 2026 तक मरम्मत कार्य प्रस्तावित है। इस दौरान यातायात को डायवर्ट करने के लिए ब्रिज नंबर-38 को वैकल्पिक मार्ग बनाया जाना तय हुआ था। इसके लिए रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर ने 27 मई 2026 को ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और स्थानीय पुलिस को पत्र भेजकर सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर दी थी। परंतु, जिस वन भूमि का उपयोग किया जा रहा था, उसके स्वामी ‘वन विकास निगम’ को न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही वैधानिक अनुमति ली गई।

ये खबर भी पढ़ें…
राधे मोहन रामायण समिति गौरेला के 42 श्रद्धालुओं का जत्था नर्मदा परिक्रमा के लिए रवाना,
राधे मोहन रामायण समिति गौरेला के 42 श्रद्धालुओं का जत्था नर्मदा परिक्रमा के लिए रवाना,
September 26, 2026
राधे मोहन रामायण समिति गौरेला के 42 श्रद्धालुओं का जत्था नर्मदा परिक्रमा के लिए रवाना, गौरेला नगर पालिका अध्यक्ष एवं...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

​चोरी पकड़े जाने पर व्हाट्सएप से भेजी सूचना :- ​इस अवैध निर्माण की भनक वन विभाग को तब लगी जब स्थानीय ग्रामीणों ने मौके पर चल रही जेसीबी मशीनों को देखकर विभागीय कर्मचारियों को सूचित किया। वन कर्मियों द्वारा मौके का निरीक्षण करने और रेलवे ठेकेदार से पूछताछ किए जाने के बाद, घिरते देख रेलवे ने 4 जून 2026 को आनन-फानन में वन विकास निगम को व्हाट्सएप के माध्यम से एक औपचारिक सूचना भेजकर औपचारिकता पूरी करने का प्रयास किया।

​मुख्य बिंदु जो खड़े करते हैं गंभीर सवाल ​कागजों में था 2005 का प्लांटेशन :-                                        • दस्तावेजों के मुताबिक, कंपार्टमेंट क्रमांक 995 में वर्ष 2005 में बड़े पैमाने पर पौधारोपण (प्लांटेशन) किया गया था, जहां रिकॉर्ड में हजारों पौधे दर्ज थे। अब रेलवे का दावा है कि निर्माण स्थल पर कोई पेड़-पौधे मौजूद ही नहीं थे। ऐसे में सवाल उठता है कि करोड़ों की लागत से हुए पौधारोपण के वे पौधे कहां गायब हो गए? क्या वे सिर्फ कागजों पर थे या उन्हें बिना अनुमति नष्ट कर दिया गया?

ये खबर भी पढ़ें…
September 28, 2026
*सीधी और सच्ची बात साहस के साथ रखें युवा, नई सोच को दें नई पहचान : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

​बिना अनुमति वाटरशेड कार्य भी जारी:-              इसी क्षेत्र में एक बाहरी संस्था द्वारा वाटरशेड संबंधी कार्य भी कराया जा रहा है। वन विकास निगम के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि उन्हें इस कार्य की भी कोई पूर्व जानकारी या अनुमति संबंधी दस्तावेज प्राप्त नहीं हैं।

​मुख्यालय छोड़ 22 किमी दूर रह रहे कर्मचारी:-  स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बीट गार्ड और डिप्टी रेंजर के लिए क्षेत्र में शासकीय क्वार्टर उपलब्ध होने के बावजूद, अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी कार्यक्षेत्र से लगभग 22 किलोमीटर दूर बेलगहना में निवास करते हैं। फील्ड पर नियमित निगरानी न होने के कारण ही वन भूमि पर ऐसी अवैध गतिविधियां फल-फूल रही हैं।

ये खबर भी पढ़ें…
आवास सूची देने से कतरा रही नगर पंचायत मरवाही? CMO और कंप्यूटर ऑपरेटर के जवाब ने बढ़ाए सवाल..!
आवास सूची देने से कतरा रही नगर पंचायत मरवाही? CMO और कंप्यूटर ऑपरेटर के जवाब ने बढ़ाए सवाल..!
September 28, 2026
आवास सूची देने से कतरा रही नगर पंचायत मरवाही? CMO और कंप्यूटर ऑपरेटर के जवाब ने बढ़ाए सवाल मरवाही। नगर...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

​जिम्मेदारों के गैर-जिम्मेदाराना बोल:-                “मुझे जानकारी नहीं है, पता करता हूं।” नरेंद्र खूंटे, बीट गार्ड “मुझे इस कंपार्टमेंट में कितने पेड़ हैं इसकी जानकारी नहीं है। मैं अभी नया पदस्थ हुआ हूं। जब की लगभग 3 वर्ष हो गए पदस्थ हुए..? आपसे जानकारी मिली है, कल जाकर देखता हूं।”

सैमुअल तिग्गा, डिप्टी रेंजर ​”वन भूमि में कटाई और सड़क निर्माण की जानकारी अपने उच्च अधिकारियों को दे दी है। आगे की वैधानिक कार्रवाई वे करेंगे।”

फर्जी वाउचर और मजदूरी भुगतान की भी आशंका :- ​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में वर्तमान में जंगल की मार्किंग का कार्य प्रगति पर है, लेकिन इसके एवज में संबंधित वाउचर पहले ही भर लिए गए हैं। ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की है कि फील्ड में अधिकारियों की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर मजदूरी भुगतान और कार्य निष्पादन में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की जा रही है।

​उच्च स्तरीय जांच और स्वतंत्र ऑडिट की मांग :- ​इस पूरे घालमेल को लेकर स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। उन्होंने मांग की है कि वन भूमि पर बिना अनुमति सड़क निर्माण करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए, साथ ही वर्ष 2005 के प्लांटेशन कार्यों का किसी स्वतंत्र एजेंसी से फिजिकल और वित्तीय ऑडिट कराया जाए ताकि करोड़ों रुपये के इस कथित घोटाले का सच सामने आ सके

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!