नियम ताक पर: गौरेला में व्याख्याता को बना दिया BEO; क्या राज्य शासन अपने ही आदेश को दिखा रहा ठेंगा?

मिथलेश आयम की रिपोर्ट, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के शिक्षा विभाग में नियमों की धज्जियां उड़ाने और चहेतों को मलाईदार कुर्सियां बांटने का एक ऐसा खेल सामने आया है, जिसने पूरी शिक्षा व्यवस्था की साख को तार-तार कर दिया है। एक तरफ राज्य शासन का सख्त और स्पष्ट आदेश है कि किसी भी व्याख्याता को प्राचार्य या उच्च प्रशासनिक पदों पर नहीं बैठाया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ, शासन अपने ही आदेश को ठेगा दिखा कर सारे कायदे-कानूनों को रद्दी की टोकरी में फेंकते हुए विकासखंड गौरेला में व्याख्याता उपेंद्र सिंह ठाकुर को सीधे प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की कमान सौंप दी गई है। यह कोई साधारण चूक नहीं, बल्कि शासन के आदेशों की सरेआम अवहेलना है।
शासन का आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित :-

स्कूल शिक्षा विभाग के नियम और निर्देश क्या सिर्फ छोटे कर्मचारियों को डराने के लिए हैं? यह सवाल आज जिले का हर शिक्षक पूछ रहा है। जब शासन की नीति साफ है कि व्याख्याता को उच्च प्रशासनिक प्रभार नहीं देना है, तो फिर गौरेला में उपेंद्र सिंह ठाकुर पर इतनी मेहरबानी क्यों बरसाई जा रही है? क्या राज्य शासन के आदेश सीधे साधे अधिकारियो को डराने के लिए ही रहता है। या राज्य शासन का आदेश का कोई मायने नहीं रखते, या फिर इसके पीछे कोई बड़ा ‘खेल’ चल रहा है..?
वरिष्ठ अधिकारियों का अपमान, चहेतों को सम्मान :-

जिले में कई योग्य, अनुभवी और वरिष्ठ प्राचार्य मौजूद हैं, जो इस पद की पूरी अर्हता रखते हैं। लेकिन उन्हें दरकिनार कर एक व्याख्याता को ब्लॉक की कमान सौंप देना वरिष्ठ अधिकारियों के आत्मसम्मान पर सीधा प्रहार है। इस तानाशाहीपूर्ण रवैये से विभाग के भीतर भारी आक्रोश है। दबी जुबान में अधिकारी और शिक्षक कह रहे हैं कि इस जिले में योग्यता और वरिष्ठता की कोई कीमत नहीं है यहाँ सिर्फ ‘रसूख’ और ‘साठगांठ’ की नीति चलती है।















