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कैम्पा फंड में ‘कैम्पा’ का खेल: मरवाही वनमंडल में फर्जी खर्च, कमीशनखोरी और फंड की बंदरबांट — रेंजर से लेकर रिटायर्ड CCF तक भ्रष्टाचार की जद में, जांच केवल दिखावा साबित

कैम्पा फंड में ‘कैम्पा’ का खेल: मरवाही वनमंडल में फर्जी खर्च, कमीशनखोरी और फंड की बंदरबांट — रेंजर से लेकर रिटायर्ड CCF तक भ्रष्टाचार की जद में, जांच केवल दिखावा साबित

रायपुर- मरवाही:छत्तीसगढ़ के मरवाही वनमंडल में केंद्र सरकार की ग्रीन क्रेडिट योजना और कैम्पा योजना के तहत भारी अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। खोडरी, गौरेला और मरवाही रेंज में सरकारी धन के दुरुपयोग, फर्जी रोपण, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, कुछ जमे हुए और पुराने वनकर्मियों ने नए डीएफओ की नियुक्ति का लाभ उठाकर नियमों की अनदेखी की और करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में गड़बड़ी कर डाली।

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कैसे हुआ भ्रष्टाचार का खेल:

सरकारी नियमों के मुताबिक पौधों की तकनीकी तैयारी, गुणवत्ता युक्त पौधों की खरीद और रोपण अनिवार्य था। मगर, रेंजरों और उनके सहयोगियों ने छोटे पौधों या बीज से ही काम चला लिया। कुछ स्थानों पर मनरेगा योजना की नर्सरी से पौधे लेकर फर्जी खरीद दिखाकर फंड निकाले गए। साथ ही, मैटेरियल आपूर्ति में भी नीचे से ऊपर तक कमीशनखोरी का खेल खेला गया।

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धनौली परिसर में जंगल को ही रोपण क्षेत्र बताकर व्यय दिखाया गया। यह भ्रष्टाचार केवल फील्ड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके तार कर्मचारियों के संगठनों और उच्च अधिकारियों तक जुड़े नजर आ रहे हैं।

डीएफओ की कार्रवाई, लेकिन असर शून्य:

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जब मामला डीएफओ और सीसीएफ के संज्ञान में आया, तो खोडरी रेंजर मनीष श्रीवास्तव, क्षेत्र सहायक उदय तिवारी और परिसर रक्षक राकेश राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। कुछ अन्य कर्मचारियों का तबादला भी किया गया। लेकिन, कार्रवाई के बाद भी आरोपी कर्मचारी खुलेआम कार्य करते पाए गए।

सूत्रों की मानें तो इन अधिकारियों ने संघ का सहारा लेकर अधिकारियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और एक वायरल ऑडियो के जरिए पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। ऑडियो में मनीष श्रीवास्तव से 3 लाख और मान सिंह श्याम से 1.5 लाख रुपए में बहाली की बात सामने आई। निलंबित मान सिंह श्याम को एडवांस में उड़नदस्ता का प्रभारी रेंजर तक बना दिया गया। यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई कार्रवाई सिर्फ कागजी है।

रिटायर्ड सीसीएफ पर भी गंभीर आरोप:

मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) प्रभात मिश्रा, जो हाल ही में सेवा से सेवानिवृत्त हुए हैं, उन पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों का दावा है कि रिटायरमेंट के एक दिन पहले ही उन्होंने पैसे लेकर निलंबित कर्मचारियों की बहाली की। इस पूरे घटनाक्रम ने विभाग की कार्यप्रणाली और ईमानदारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

जांच समिति बनी, लेकिन रिपोर्ट नदारद: 11 सितंबर 2025 को सीसीएफ श्रीनिवास राव के निर्देश पर जांच समिति गठित की गई थी___

जांच समिति के सदस्य:

1. श्री गुरुनाथन एन सिंह – प्रभारी वन संरक्षक (भू-प्रबंध) – अध्यक्ष

2. श्री पुष्कर कुमार साहू – सहायक वन संरक्षक, जैव विविधता बोर्ड – सदस्य

3. श्री डी.के.एस. मौर्य – विषय विशेषज्ञ (कैम्पा) – सदस्य सचिव

इस समिति को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपनी थी, लेकिन आज तक कोई रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। अधिकारियों पर दबाव और मामले को रफा-दफा करने की कोशिशें जांच में देरी का कारण बन रही हैं।यह सब दर्शाता है कि विभागीय कार्रवाई महज एक दिखावा बनकर रह गई है और “पैसा ही सब कुछ” की मानसिकता विभाग में गहराई से जड़ें जमा चुकी है विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि अस्थायी और कमजोर सुरक्षा उपायों के चलते पौधों की रक्षा नहीं हो पा रही है। अधिकारियों की लापरवाही से करोड़ों की परियोजनाएं खतरे में हैं।

डीएफओ”जांच टीम 1–2 दिन में आने वाली है, अभी तक निरीक्षण नहीं हुआ है।”

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