
कैशलेस चिकित्सा योजना पर बढ़ी उम्मीदें: सम्मेलन के बाद डेलिगेशन टीम को सचिवालय का बुलावा
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही/भिलाई, 27 जुलाई। छत्तीसगढ़ कैशलेस चिकित्सा सेवा कर्मचारी कल्याण संघ द्वारा आयोजित कैशलेस चिकित्सा क्रियान्वयन महा सम्मेलन के बाद कर्मचारियों की लंबे समय से लंबित मांग पर शासन स्तर पर सकारात्मक पहल शुरू हो गई है। सम्मेलन में कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना को शीघ्र लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी।

इसी क्रम में संघ की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती उषा चंद्राकर के नेतृत्व में एक डेलिगेशन टीम को सचिवालय में चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया है। प्रस्तावित बैठक में कैशलेस चिकित्सा योजना के नियमों, संचालन की रूपरेखा और इसके शीघ्र क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
संघ ने सचिवालय से मिले इस आमंत्रण को कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम बताया है। संगठन का कहना है कि शासन के साथ होने वाली यह चर्चा प्रदेश के लाखों शासकीय कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को जल्द कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि भिलाई में आयोजित कैशलेस चिकित्सा क्रियान्वयन महा सम्मेलन में प्रदेश के विभिन्न विभागों के कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। सम्मेलन में जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से संगठन के संस्थापक एवं प्रदेश संयोजक पीयूष गुप्ता, संभाग पदाधिकारी दिनेश राठौर, जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश सोनवानी, जिला पदाधिकारी बलराम तिवारी, त्रिभुवनदास गोयल, रंजीत राठौर एवं श्रीमती अर्चना गुप्ता सहित अन्य पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
जिला अध्यक्ष ओमप्रकाश सोनवानी ने कहा कि “भिलाई में आयोजित महा सम्मेलन में कर्मचारियों की एकजुटता ने यह साबित कर दिया है कि कैशलेस चिकित्सा योजना अब केवल मांग नहीं, बल्कि कर्मचारियों का अधिकार बन चुकी है। सचिवालय से चर्चा के लिए मिला आमंत्रण कर्मचारियों के संघर्ष की पहली बड़ी सफलता है। हमें विश्वास है कि शासन जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर योजना को लागू करेगा, जिससे प्रदेश के लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर एवं निःशुल्क उपचार की सुविधा मिल सकेगी।”

संघ के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि सचिवालय में होने वाली चर्चा के बाद कैशलेस चिकित्सा योजना को जल्द अंतिम रूप देकर प्रदेशभर में लागू किया जाएगा, जिससे कर्मचारियों को इलाज के दौरान आर्थिक परेशानियों से राहत मिल सकेगी।















