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​गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: डबल इंजन की सरकार मे जिला अस्पताल की बुरा हाल, प्रबंधन की लापरवाही मोबाइल टॉर्च की रोशनी में हुआ प्रसूता का ऑपरेशन, नवजात की मौत जिम्मेदार कौन…? 

डॉक्टर पर अवैध वसूली का आरोप, बिना पैसे दिए मरीज को ऑपरेशन थिएटर में नहीं ले जाने का दावा

मिथलेश आयम की रिपोर्ट ​गौरेला-पेंड्रा-मरवाही -: जिले के स्वास्थ्य महकमे से एक बेहद झकझोर देने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। जिला चिकित्सालय में डिलीवरी के लिए आई एक गर्भवती महिला के परिजनों से कथित तौर पर अवैध वसूली की गई। हद तो तब हो गई जब ऑपरेशन के दौरान बिजली गुल हो गई और डॉक्टरों ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर सर्जरी की। इस पूरी अव्यवस्था और लापरवाही के बीच नवजात शिशु की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश है और वे दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

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​पैसे न देने पर ऑपरेशन से किया इनकार :- 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मरवाही के बरौर गांव निवासी तपेश्वर प्रसाद यादव अपनी 20 वर्षीय गर्भवती पत्नी पल्लवी यादव को प्रसव के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। तपेश्वर का आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने ब्लड टेस्ट के नाम पर 2800 रुपये की मांग की। जब परिजनों ने असमर्थता जताई, तो डॉक्टर ने कथित तौर पर साफ कह दिया कि बिना पैसों के ऑपरेशन नहीं किया जाएगा। मजबूर होकर तपेश्वर ने ‘आरती परतोती’ नामक किसी महिला के फोनपे (PhonePe) खाते में 1000 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए और 1800 रुपये नकद दिए। परिजनों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब तक पूरे पैसे का भुगतान नहीं हो गया, प्रसूता को तड़पते हुए छोड़ दिया गया और उसे ऑपरेशन थिएटर में नहीं ले जाया गया।

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​टॉर्च की रोशनी में चीरफाड़ और बच्चे की मौत पर विरोधाभास :- 

परिजनों का कहना है कि पैसे लेने के बावजूद उन्हें कोई ब्लड रिपोर्ट नहीं दिखाई गई। जब उन्होंने सरकारी अस्पताल में इस तरह पैसे मांगने पर ऐतराज जताया, तो डॉक्टर ने उन्हें रेफर करने की धमकी दी और अभद्र व्यवहार किया।​ अस्पताल की बदइंतजामी का आलम यह था कि ऑपरेशन के दौरान तीन बार बिजली गुल हुई। पावर बैकअप न होने के कारण डॉक्टरों को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन करना पड़ा। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन से महज़ आधा घंटा पहले तक डॉक्टरों ने गर्भ में बच्चे को पूरी तरह स्वस्थ बताया था, लेकिन डिलीवरी के बाद कह दिया गया कि बच्चे की मौत 4 घंटे पहले ही हो चुकी थी। इस विरोधाभासी बयान ने परिजनों के मन में गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।

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​अधिकारियों के गोलमोल जवाब :- 

इस पूरे मामले पर जब संबंधित स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा विश्वास से जवाब मांगा गया, तो उन्होंने कुछ भी स्पष्ट कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सीएमएचओ (CMHO) की अनुमति के बिना वह मीडिया से कोई जानकारी साझा नहीं कर सकतीं।

दूसरी ओर, सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र सिंह पैकरा ने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें इसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से ही मिली है। बता दें ये कोई पहला मामला नहीं है कई मामलो मे सिविल सर्जन को जानकारी ही नहीं होता है, क्या हॉस्पिटल का प्रोपर मानेंटरिंग नहीं किया जाता है, फिलहाल इस मामले मे आश्वासन दिया गया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

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