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गौसेवा की आड़ में संगीन खेल? वन भूमि कब्जा, चंदा वसूली, शराबखोरी और संदिग्ध गतिविधियों के आरोपों से घिरी सुरभि गौशाला

कटघोरा/लखनपुर : धर्म, सेवा और गौसंरक्षण के नाम पर संचालित श्री सुरभि गौशाला लखनपुर इन दिनों नगर में तीखी बहस और विवाद का केंद्र बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गौशाला प्रबंधन पर ऐसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनसे पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई है। आरोपों में वन विभाग की लगभग 10 एकड़ भूमि पर कब्जा, सरकारी गौठान को निजी नियंत्रण में लेना, गौवंश के नाम पर चंदा वसूली और परिसर में कथित अवैध गतिविधियों के संचालन जैसी बातें शामिल हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके पास जमीन से जुड़े दस्तावेज, फोटो-वीडियो साक्ष्य और अन्य प्रमाण मौजूद हैं, जिन्हें वे प्रशासनिक जांच के दौरान प्रस्तुत करने को तैयार हैं। उनका दावा है कि यदि निष्पक्ष जांच हो, तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

वन भूमि पर कब्जे का आरोप

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस क्षेत्र में गौशाला का विस्तार किया गया है, वह वन विभाग के अभिलेखों में दर्ज भूमि है। कहा जा रहा है कि लगभग 10 एकड़ क्षेत्र को घेरकर उसे गौशाला परिसर का हिस्सा बना लिया गया। यदि यह सही साबित होता है, तो यह वन संरक्षण कानूनों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। नगर में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या संबंधित विभागों ने कभी सीमांकन कराया? यदि भूमि वन विभाग की है, तो उसका हस्तांतरण किस प्रक्रिया के तहत हुआ? या फिर बिना अनुमति के विस्तार किया गया? इन प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर अब तक सामने नहीं आए हैं।

सरकारी गौठान को निजी संचालन में बदलने का मामला

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आरोप यह भी है कि शासन द्वारा स्थापित सरकारी गौठान को निजी नियंत्रण में लेकर उसे एक निजी गौशाला की तरह संचालित किया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस व्यवस्था को सार्वजनिक हित और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था, उसे सीमित लोगों के नियंत्रण में कर दिया गया। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल शासन की योजना के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के कथित अतिक्रमण और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर अनियमितता का संकेत भी माना जाएगा।

गौवंश के नाम पर चंदा और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल

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गौसेवा और धार्मिक भावना का हवाला देकर बड़े पैमाने पर चंदा एकत्र किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दानदाताओं को आय-व्यय का स्पष्ट और सार्वजनिक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया गया। नगर में चर्चा है कि यदि संस्था पारदर्शी है तो वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किए जाते? क्या नियमित ऑडिट हुआ? क्या शासन से प्राप्त अनुदान का हिसाब उपलब्ध है? इन सवालों के जवाब को लेकर लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

शराबखोरी और अन्य संदिग्ध गतिविधियों की चर्चा

कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि गौशाला परिसर में कथित रूप से शराब सेवन और अन्य अनुचित गतिविधियों की घटनाएं हुई हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि वे संबंधित साक्ष्य जांच एजेंसियों को देने के लिए तैयार हैं। यदि इन आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह गौसेवा के नाम पर गंभीर दुरुपयोग और सामाजिक आस्था को ठेस पहुंचाने का मामला बन सकता है। यही कारण है कि लोग स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

गौठान परिसर में विवाह की घटना से उठे सवाल

हाल ही में नगर में यह चर्चा भी रही कि इसी गौठान परिसर में लगभग 40 वर्षीय व्यक्ति और 20 वर्षीय युवती का विवाह कराया गया। इस घटना ने भी कई प्रकार के सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सार्वजनिक स्थल का उपयोग निजी आयोजनों के लिए किया गया, तो इसकी अनुमति किस आधार पर दी गई? प्रशासन की ओर से इस विषय में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आने से अटकलें और तेज हो गई हैं।

प्रशासन की चुप्पी और जनाक्रोश

इतने गंभीर आरोपों के बावजूद वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस सार्वजनिक कार्रवाई सामने नहीं आई है। नगर में चर्चा है कि यदि आरोप निराधार हैं तो प्रशासन को खुलकर सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, और यदि आरोपों में दम है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

निष्पक्ष और संयुक्त जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि एक संयुक्त जांच टीम गठित कर भूमि रिकॉर्ड, सीमांकन, वित्तीय दस्तावेज और परिसर की गतिविधियों की व्यापक जांच कराई जाए। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उनके पास उपलब्ध साक्ष्य वे जांच एजेंसियों को सौंपने के लिए तैयार हैं।

नगर में अब यह चर्चा आम है कि सच्चाई सामने आनी ही चाहिए — चाहे आरोप गलत साबित हों या सही। क्योंकि गौसेवा जैसी पवित्र भावना के नाम पर किसी भी प्रकार की अनियमितता समाज के विश्वास को चोट पहुंचाती है।

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