
लगातार शिकायतों के बाद सचिव हटे, लेकिन क्या सिर्फ ट्रांसफर से दब जाएगा लाखों की कथित गड़बड़ी का मामला?
आमागोहन पंचायत में कार्रवाई का पहला कदम या सिर्फ औपचारिकता? अब सरपंच और जिम्मेदार अधिकारियों पर उठे सवाल

जीशान अंसारी की रिपोर्ट
कोटा/बिलासपुर।ग्राम पंचायत आमागोहन में लाखों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं, विकास कार्यों में गड़बड़ी और ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बीच आखिरकार पंचायत सचिव राजेश कुमार उइके को हटा दिया गया है। जिला पंचायत बिलासपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 5 अगस्त 2026 को जारी आदेश के अनुसार उन्हें ग्राम पंचायत आमागोहन से हटाकर जनपद पंचायत कोटा कार्यालय में संलग्न कर दिया गया है। वहीं ग्राम पंचायत बिटकुली के सचिव अनूप कुमार मंजुमदार को आमागोहन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पंचायत में कथित वित्तीय अनियमितताओं, निर्माण कार्यों में गड़बड़ी, ग्राम सभाओं में अनियमितता और ग्रामीणों से दुर्व्यवहार जैसे गंभीर आरोप लगातार उठते रहे हैं। शिकायतें सीएम हेल्पलाइन, सुशासन शिविर, जनपद पंचायत, जिला पंचायत और अन्य प्रशासनिक मंचों तक पहुंचीं, लेकिन कार्रवाई में लंबा समय लग गया।
‘खबरों का राजा’ की खबरों के बाद हरकत में आया विभाग

खबरों का राजा वेब पोर्टल ने आमागोहन पंचायत की कथित अनियमितताओं को लगातार प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों की शिकायतें, जांच की मांग और पंचायत में चल रही कथित गड़बड़ियों को बार-बार प्रकाशित किए जाने के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हुई और अंततः सचिव को हटाने का आदेश जारी करना पड़ा।
सबसे बड़ा सवाल—अगर आरोप गंभीर थे तो सिर्फ ट्रांसफर क्यों?
सचिव को हटाने के आदेश के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि शिकायतें और जांच इतनी गंभीर थीं तो कार्रवाई केवल पंचायत बदलने तक ही क्यों सीमित रही? ग्रामीण पूछ रहे हैं— क्या सिर्फ दूसरी जगह संलग्न कर देना ही सजा है? यदि जांच में अनियमितताएं मिली हैं तो विभागीय कार्रवाई कब होगी? शासकीय राशि की कथित गड़बड़ी की वसूली कौन करेगा? क्या दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी आदेश में कारण का जिक्र नहीं, बढ़ा संदेह
जिला पंचायत के आदेश में सचिव को हटाने का उल्लेख तो है, लेकिन कार्रवाई का कारण नहीं बताया गया। यही बात पूरे मामले को और संदेह के घेरे में ला रही है। यदि कार्रवाई शिकायतों और जांच के आधार पर हुई है तो आदेश में उसका उल्लेख क्यों नहीं किया गया?
क्या सिर्फ सचिव जिम्मेदार हैं?
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत के विकास कार्य सचिव अकेले नहीं करते। भुगतान, निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों में सरपंच सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भी भूमिका होती है। ऐसे में यदि कथित वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं तो केवल सचिव को हटाकर मामले को खत्म नहीं किया जा सकता। अब ग्रामीणों की मांग ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच पूरी की जाए। दोषी पाए जाने वालों से शासकीय राशि की वसूली हो।
संबंधित सरपंच एवं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
आवश्यकता पड़ने पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई भी की जाए।
अब निगाहें प्रशासन पर हैं।क्या सचिव का स्थानांतरण ही इस पूरे मामले का अंत होगा, या फिर जांच के आधार पर सरपंच और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गाज गिरेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में प्रशासन को देना होगा।















