
कोटमी में औचक निरीक्षण, लेकिन बैगा अंचल के बदहाल स्कूलों पर कब पड़ेगी DEO की नजर?
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने कोटमी स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान प्राचार्य एस.के. सिंह बिना सूचना के अनुपस्थित मिले, जिस पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। विद्यालय की साफ-सफाई, बच्चों की कम उपस्थिति, पिछले सत्र के खराब परीक्षा परिणाम, कैश बुक का संधारण नहीं होना, फीस की राशि बैंक खाते में जमा न कर शिक्षकों के पास रखना तथा शिक्षकों की डेली डायरी में अध्यापन संबंधी जानकारी स्पष्ट नहीं मिलने जैसी गंभीर अनियमितताओं पर जिला शिक्षा अधिकारी ने नाराजगी जताई।


उन्होंने शिक्षकों को समय पर उपस्थित रहने, नियमित पठन-पाठन कराने, वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के सख्त निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान साक्षरता नोडल अधिकारी आलोक शुक्ला एवं बीआरसी संतोष सोनी भी मौजूद रहे।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल… बैगा बाहुल्य साल्हेघोरी क्षेत्र के स्कूलों पर कब होगी ऐसी सख्ती?
कोटमी स्कूल में अनियमितताओं पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन गौरेला विकासखंड के बैगा बाहुल्य साल्हेघोरी क्षेत्र के कई प्राथमिक विद्यालय लंबे समय से बदहाल स्थिति में हैं। वहां न पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं हैं, न सुरक्षित पहुंच मार्ग, न ही कई स्थानों पर शिक्षा का स्तर संतोषजनक दिखाई देता है।


हाल ही में सामने आए तथ्यों के अनुसार कुछ स्कूलों में चौथी और पांचवीं कक्षा के विद्यार्थी सामान्य हिंदी तक पढ़ने में असमर्थ पाए गए, जबकि कई विद्यालयों में शौचालय, किचन शेड और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी अभाव है। इसके बावजूद इन स्कूलों में व्यापक स्तर पर औचक निरीक्षण और जवाबदेही तय होती नजर नहीं आती।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या निरीक्षण केवल मुख्यालय और चुनिंदा स्कूलों तक ही सीमित रहेगा, या फिर बैगा अंचल के उन दूरस्थ विद्यालयों तक भी पहुंचेगा, जहां शिक्षा व्यवस्था सबसे अधिक सुधार की मांग कर रही है? यदि शिक्षा विभाग वास्तव में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के अपने दावे पर गंभीर है, तो बैगा बाहुल्य क्षेत्रों के विद्यालयों का भी नियमित, निष्पक्ष और प्रभावी निरीक्षण आवश्यक है। अन्यथा कार्रवाई केवल चुनिंदा स्कूलों तक सीमित रहने का संदेश जाएगा और सबसे अधिक जरूरतमंद बच्चों तक सुधार की पहल नहीं पहुंच पाएगी।



















