
300 क्विंटल राशन कहाँ गया? कोटा की राशन दुकान पर बड़ा घोटाले का आरोप, जनप्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा
कलेक्टर से उच्चस्तरीय जांच की मांग, 3 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो भूख हड़ताल की चेतावनी

कोटा/बिलासपुर | जीशान अंसारी की रिपोर्ट
कोटा जनपद क्षेत्र के नवागांव (सलका) स्थित सहकारी विपणन संस्था के उपकेंद्र (राशन दुकान) में राशन वितरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि पिछले छह महीनों से गरीब और पात्र हितग्राहियों को उनका पूरा राशन नहीं दिया गया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में भारी मात्रा में अनाज का हिसाब संदिग्ध नजर आ रहा है। आरोप है कि करीब 300 क्विंटल राशन के वितरण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।


मामले को लेकर जनपद सदस्य धर्मेंद्र देवांगन के नेतृत्व में कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि जुलाई माह में केवल करीब 20 प्रतिशत राशन का वितरण हुआ, जबकि 80 प्रतिशत पात्र हितग्राहियों को राशन नहीं मिला।

जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि पिछले छह माह का स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और हितग्राहियों का रिकॉर्ड जब्त कर उसकी विस्तृत जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच में राशन के गबन या अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
मामले में खाद्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ज्ञापन में विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जांच कर दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान अली बाबा कश्यप, मनोज मरावी (जनपद सदस्य), सचिन साहू, नेतु यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।
3 दिन का अल्टीमेटम, फिर भूख हड़ताल
जनपद सदस्य धर्मेंद्र देवांगन ने प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि इस अवधि में जांच शुरू नहीं हुई तो वे भूख हड़ताल पर बैठेंगे। उनका कहना है कि गरीबों के हक का राशन किसी भी कीमत पर हड़पने नहीं दिया जाएगा और दोषियों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या 300 क्विंटल राशन का सच सामने आएगा, या यह मामला भी जांच के नाम पर फाइलों में दब जाएगा?















