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जनदर्शन शिकायत के जवाब पर उठे सवाल, संलग्न कर्मचारियों को लेकर शिक्षा विभाग घिरा

जनदर्शन शिकायत के जवाब पर उठे सवाल, संलग्न कर्मचारियों को लेकर शिक्षा विभाग घिरा

बैकुण्ठपुर। कोरिया जिले में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के कथित संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। जनदर्शन में दर्ज शिकायत के निराकरण में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा दिए गए जवाब और उपलब्ध शासकीय दस्तावेजों के बीच कथित विरोधाभास ने प्रशासनिक पारदर्शिता और शिकायत निवारण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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जानकारी के अनुसार जनदर्शन शिकायत क्रमांक 2010226000772 के जवाब में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने अपने पत्र क्रमांक 2742 के माध्यम से स्पष्ट किया कि शिक्षा विभाग का कोई भी कर्मचारी किसी अन्य विभाग अथवा कार्यालय में संलग्न नहीं है। लेकिन शिकायतकर्ता ने इस दावे को चुनौती देते हुए कई दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं, जिनमें कुछ कर्मचारियों के अन्य कार्यालयों में कार्यरत होने का उल्लेख किया गया है।

 

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शिकायतकर्ता का दावा है कि बैकुण्ठपुर तहसील कार्यालय में शिक्षा विभाग के कर्मचारी वर्तमान में सेवाएं दे रहे हैं। इतना ही नहीं, संबंधित विद्यालयों के प्राचार्यों द्वारा इन कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजने के लिए पत्राचार भी किया गया है। प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार कलेक्टर कार्यालय द्वारा 07 अप्रैल 2026 को जारी आदेश में भी विभिन्न विभागों में संलग्न कर्मचारियों को मूल पदस्थापना स्थल पर वापस करने के निर्देश दिए गए थे।

मामले में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कटकोना के प्राचार्य द्वारा जारी पत्र क्रमांक 172 सहित अन्य पत्रों का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन पत्रों में विद्यालय के कर्मचारियों की वापसी की मांग करते हुए बताया गया है कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण विद्यालय का नियमित संचालन प्रभावित हो रहा है। साथ ही कई आवश्यक कार्य वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से कराए जाने के कारण अतिरिक्त आर्थिक भार भी वहन करना पड़ रहा है।

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पूरा विवाद इस बात को लेकर है कि यदि विद्यालयों द्वारा कर्मचारियों की वापसी के लिए लगातार पत्र लिखे जा रहे हैं और अन्य कार्यालयों में उनकी सेवाएं ली जा रही हैं, तो फिर जनदर्शन शिकायत के जवाब में यह कैसे कहा गया कि कोई भी कर्मचारी संलग्न नहीं है। यही प्रश्न अब प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि तहसील कार्यालय में कर्मचारियों के संलग्न रहने से कुछ प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। वहीं संबंधित विभागों की ओर से भी अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि शिकायत के निराकरण में तथ्यात्मक त्रुटि हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। वहीं यदि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने उपलब्ध विभागीय अभिलेखों के आधार पर जवाब दिया है, तो पूरे मामले को स्पष्ट करने के लिए संबंधित दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

फिलहाल इस प्रकरण ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली, शिकायत निवारण व्यवस्था की विश्वसनीयता और विभागीय जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल कर्मचारियों के संलग्नीकरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की बड़ी बहस का विषय बन सकता है।

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