
ब्रेकिंग न्यूज़ | कोटमी में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, रोजाना 5-6 घंटे बिजली गुल!
मेंटेनेंस के नाम पर कटौती, फिर भी व्यवस्था बदहाल! सुबह से बिजली बंद होने से ग्रामीण परेशान, दर्जनों कर्मचारी तैनात होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं।

कोटमी (GPM)। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के कोटमी क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बिजली आपूर्ति को लेकर लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि प्रतिदिन करीब 5 से 6 घंटे तक बिजली बंद रहने की समस्या सामने आ रही है। वहीं, आज सुबह से बिजली गुल होने के कारण ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
मेंटेनेंस के नाम पर कटौती, फिर भी व्यवस्था क्यों बदहाल?

बिजली विभाग द्वारा मेंटेनेंस और अधिक लोड जैसी वजहों से बिजली बंद किए जाने की बात सामने आती है, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र की बिजली व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं हो रहा है? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब बिजली विभाग में दर्जनों कर्मचारी तैनात हैं, तो फिर बार-बार बिजली बंद होने की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा है? यदि मेंटेनेंस के नाम पर बिजली आपूर्ति बाधित की जा रही है, तो उसका असर व्यवस्था में सुधार के रूप में क्यों नहीं दिखाई दे रहा?
बिजली बिल वसूली में सक्रियता, समस्या के समाधान में देरी क्यों?

ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली कनेक्शन काटने और बकाया वसूली के मामले में विभागीय अमला सक्रिय नजर आता है, लेकिन जब बिजली आपूर्ति बाधित होती है, तब समस्या के समाधान में देरी क्यों होती है? ग्रामीणों का कहना है कि बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए उन्हें बार-बार परेशान होना पड़ रहा है।
कनिष्ठ यंत्री की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे सवाल
कोटमी क्षेत्र में बिजली व्यवस्था की बदहाली को लेकर संबंधित कनिष्ठ यंत्री की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में विभागीय अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
बड़ा सवाल: आखिर कब मिलेगी ग्रामीणों को राहत?
प्रतिदिन 5 से 6 घंटे बिजली बंद रहने और सुबह से आपूर्ति बाधित होने की शिकायतों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कोटमी क्षेत्र की बिजली व्यवस्था कब सुधरेगी? मेंटेनेंस और लोड की समस्या का स्थायी समाधान कब निकलेगा? और जिम्मेदार अधिकारी ग्रामीणों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कब ठोस कदम उठाएंगे?















