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आदिवासी क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल: निरीक्षण में प्रधानपाठक नशे की हालत में मिले, शिक्षक अनुपस्थित—दोनों को कारण बताओ नोटिस

आदिवासी क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल: निरीक्षण में प्रधानपाठक नशे की हालत में मिले, शिक्षक अनुपस्थित—दोनों को कारण बताओ नोटिस

जीशान अंसारी की कलम से

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CM हेल्पलाइन शिकायत के बाद शिक्षा विभाग की कार्रवाई; 31 अगस्त के आकस्मिक निरीक्षण में सामने आई लापरवाही | संकुल समन्वयक से लेकर BRC, DMC, BEO और DEO के नियमित दौरे पर भी उठे सवाल

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बिलासपुर/कोटा। कोटा विकासखंड के दूरस्थ एवं आदिवासी-बैगा बाहुल्य टाटीधार क्षेत्र की शासकीय शालाओं में शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। शिक्षकों की अनुपस्थिति और विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्था की शिकायतों के बाद 31 अगस्त 2026 को एबीईओ संध्या जायसवाल एवं एबीईओ दीपिका रोज किंडो द्वारा आकस्मिक निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान प्राथमिक शाला भस्को के प्रधानपाठक भरतराम यादव के ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में पाए जाने तथा शिक्षक पुष्पकान्त पेंद्रों के अनुपस्थित पाए जाने की बात सामने आई। दोनों मामलों में शिक्षा विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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भस्को में प्रधानपाठक नशे की हालत में मिले

31 अगस्त को किए गए निरीक्षण को लेकर जारी विभागीय नोटिस में शासकीय प्राथमिक शाला नरको/भस्को से संबंधित प्रधानपाठक भरतराम यादव के संबंध में ड्यूटी के दौरान मादक पदार्थ के सेवन का उल्लेख किया गया है।

विभाग ने इसे शासकीय कर्तव्य के प्रति मनमानी, घोर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता बताते हुए स्पष्टीकरण मांगा है।

मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि प्रधानपाठक विद्यालय में बच्चों एवं अन्य शिक्षकों के लिए जिम्मेदार पद पर होते हैं। अब देखना होगा कि स्पष्टीकरण के बाद विभाग उनके विरुद्ध आगे क्या कार्रवाई करता है।

दूसरे शिक्षक भी मिले अनुपस्थित, कारण बताओ नोटिस

इसी निरीक्षण कार्रवाई में शिक्षक पुष्पकान्त पेंद्रों के विद्यालय में अनुपस्थित पाए जाने के मामले में भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

विभागीय नोटिस में बिना सूचना अनुपस्थित रहने और पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद अनुपस्थिति जारी रहने का उल्लेख किया गया है। संबंधित शिक्षक से निर्धारित समय में स्पष्टीकरण मांगा गया है तथा संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

CM हेल्पलाइन शिकायत के बाद हुआ आकस्मिक निरीक्षण

बताया गया है कि क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्थिति एवं शिक्षा व्यवस्था को लेकर पहले शिकायत की गई थी। CM हेल्पलाइन एवं विभागीय शिकायत के बाद आखिरकार शिक्षा विभाग ने 31 अगस्त को आकस्मिक निरीक्षण किया, जिसमें ये मामले सामने आए।

अब सवाल यह है कि यदि शिकायत के बाद निरीक्षण में ऐसी स्थिति सामने आ सकती है, तो नियमित विभागीय निरीक्षण में यह स्थिति पहले क्यों नहीं पकड़ी गई?

संकुल समन्वयक से लेकर DEO तक के दौरे पर सवाल

आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल विभागीय निगरानी पर है।

क्षेत्र में संकुल समन्वयक, BRC, DMC, BEO और DEO स्तर के अधिकारियों के नियमित शाला भ्रमण एवं निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

यदि अधिकारी नियमित रूप से विद्यालयों का दौरा करते हैं तो फिर—

शिक्षक समय पर स्कूल पहुंच रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी क्यों नहीं हुई?

शिक्षक लगातार अनुपस्थित हैं तो इसका पता पहले क्यों नहीं चला?

विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति और पढ़ाई की स्थिति की नियमित समीक्षा क्यों नहीं हुई?

शिक्षकों के वास्तविक उपस्थिति रिकॉर्ड और विभागीय ऐप में दर्ज उपस्थिति का मिलान क्यों नहीं किया गया?

दूरस्थ विद्यालयों में कक्षा संचालन एवं बच्चों के Learning Outcomes की नियमित जांच क्यों नहीं हुई?

एक दिन का निरीक्षण नहीं, लगातार निगरानी की जरूरत

आदिवासी और बैगा बाहुल्य क्षेत्र के बच्चों के लिए विद्यालय तक पहुंचना ही कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में यदि शिक्षक भी नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होंगे तो बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ेगा।

31 अगस्त का निरीक्षण यह बताता है कि शिकायत के बाद विभाग कार्रवाई कर सकता है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसी स्थिति शिकायत आने से पहले क्यों नहीं पकड़ी गई?

कारण बताओ नोटिस जारी करना निश्चित रूप से कार्रवाई की शुरुआत है, लेकिन अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच के बाद वास्तव में क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई होती है।

अब जिला स्तर से होनी चाहिए स्वतंत्र जांच

जरूरत इस बात की है कि केवल दो शिक्षकों को नोटिस जारी करने तक मामला सीमित न रहे। पिछले कई महीनों के—

शिक्षक उपस्थिति रिकॉर्ड, VSK App की उपस्थिति, अवकाश रिकॉर्ड, वेतन आहरण, संकुल समन्वयक के दौरा रजिस्टर, BRC/DMC/BEO के निरीक्षण रिकॉर्ड तथा विद्यालयों के शैक्षणिक परिणामों की जांच की जाए।

साथ ही टाटीधार क्षेत्र की शालाओं में जिला स्तर की टीम द्वारा अचानक एवं स्वतंत्र निरीक्षण कराया जाए।

सबसे बड़ा सवाल—आखिर दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र के बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी किसकी?

शिक्षा विभाग की योजनाओं में FLN और Learning Outcomes सुधारने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन जमीन पर यदि शिक्षक ही अनुपस्थित मिलें और प्रधानपाठक के खिलाफ ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में होने जैसी गंभीर स्थिति सामने आए, तो निश्चित रूप से पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब सवाल केवल दो शिक्षकों की कार्रवाई का नहीं है। सवाल यह है कि संकुल समन्वयक से लेकर BRC, DMC, BEO और DEO स्तर तक नियमित निगरानी क्यों प्रभावी नहीं हो पाई? क्या विभाग केवल शिकायत मिलने के बाद ही जागेगा, या दूरस्थ आदिवासी क्षेत्र की शालाओं में नियमित निगरानी और जवाबदेही की स्थायी व्यवस्था भी सुनिश्चित करेगा? कारण बताओ नोटिस जारी हो चुका है—अब नजर इस बात पर है कि विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है।

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