
PM आवास में पत्नी के नाम राशि, मनरेगा में फर्जी हाजिरी का खेल! रोजगार सहायक बर्खास्त, ₹1.43 लाख की वित्तीय अनियमितता उजागर
सरकारी योजनाओं में सेंधमारी पर जिला पंचायत CEO का बड़ा एक्शन, सेवा समाप्ति के साथ राशि रिकवरी की तैयारी—अब दूसरे जिलों में भी जांच की उठी मांग

बिलासपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी गरीबों के लिए संचालित महत्वाकांक्षी सरकारी योजना में कथित गड़बड़ी और मनरेगा में बिना काम कराए फर्जी हाजिरी के जरिए सरकारी राशि निकालने के मामले में जिला पंचायत सीईओ ने बड़ी कार्रवाई की है। जनपद पंचायत कोटा अंतर्गत ग्राम पंचायत कोनचरा के ग्राम रोजगार सहायक राजेंद्र पटेल की सेवा समाप्त कर दी गई है। जांच में कुल 1 लाख 43 हजार 490 रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई।
मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोप सीधे उस योजना से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है। जांच में सामने आया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत रोजगार सहायक की पत्नी के नाम कथित तौर पर 1 लाख 20 हजार रुपए की राशि निकाली गई। इसके अलावा मनरेगा में बिना वास्तविक कार्य कराए फर्जी हाजिरी दर्ज कर 23 हजार 490 रुपए मजदूरी भुगतान दर्शाने का भी मामला सामने आया।

शिकायत के बाद पूरे मामले की जांच कराई गई। जांच में रोजगार सहायक के विरुद्ध वित्तीय अनियमितता के आरोप प्रमाणित पाए गए। विभागीय कार्रवाई के दौरान उन्हें शोकॉज नोटिस जारी कर जवाब देने का अवसर दिया गया। अंतिम सुनवाई का मौका दिए जाने के बावजूद वे अपने बचाव में संतोषजनक जवाब अथवा पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद सक्षम स्तर से उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई। अब सरकारी राशि की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है।
गरीबों के आवास में सेंध, मनरेगा में फर्जी मजदूरी—जांच ने खोली पोल

सरकारी योजनाओं में रोजगार सहायकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में जिस कर्मचारी पर योजनाओं के क्रियान्वयन और हितग्राहियों से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी हो, उसी पर अपने ही परिवार के सदस्य के नाम योजना की राशि निकलवाने और मनरेगा में फर्जी मजदूरी भुगतान कराने जैसे आरोप सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है।
यह मामला केवल एक रोजगार सहायक की कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यदि एक ग्राम पंचायत में जांच के दौरान इस तरह की वित्तीय अनियमितता सामने आ सकती है, तो दूसरे जिलों और ग्राम पंचायतों में संचालित प्रधानमंत्री आवास तथा मनरेगा के अभिलेखों की भी जांच की जरूरत है।
अब उठ रहे बड़े सवाल—क्या दूसरे जिलों में उठी जांच जांच की मांग ?
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा में इसी तरह की गड़बड़ियों की व्यापक जांच पूरे जिले और प्रदेश में कराई जाएगी? ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास की किस्त, हितग्राही चयन, जियो टैगिंग, निर्माण की वास्तविक स्थिति और भुगतान प्रक्रिया की जांच के साथ-साथ मनरेगा में मस्टर रोल, फर्जी हाजिरी, मजदूरी भुगतान और वास्तविक कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो कई और मामलों की परतें खुल सकती हैं। सरकारी योजनाओं की राशि गरीबों और मजदूरों तक पहुंचाने के लिए होती है। ऐसे में यदि फर्जी दस्तावेज, गलत हाजिरी या रिश्तेदारों के नाम पर राशि निकालने जैसे मामले सामने आते हैं, तो केवल सेवा समाप्ति ही नहीं बल्कि दोषियों से शत-प्रतिशत राशि की वसूली और नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी जरूरी है।
कोनचरा का मामला अब एक चेतावनी की तरह सामने आया है। देखना होगा कि प्रशासन इस कार्रवाई को केवल एक कर्मचारी तक सीमित रखता है या फिर दूसरे ग्राम पंचायतों और जिलों में भी प्रधानमंत्री आवास व मनरेगा के पुराने भुगतान और मस्टर रोल की जांच कराकर बड़े स्तर पर कार्रवाई करता है।















