
15वें वित्त आयोग की राशि में बड़ा घोटाला ! 7 ग्राम पंचायतों पर एफआईआर के आदेश, फर्जी बिलों से सरकारी खजाने में सेंध
निर्माण अधूरे, भुगतान पूरा… जांच में खुली वित्तीय अनियमितताओं की परतें, जिला पंचायत सीईओ के सख्त निर्देश से मचा हड़कंप

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में 15वें वित्त आयोग की करोड़ों रुपये की राशि में कथित अनियमितताओं के मामले में जिला प्रशासन ने आखिरकार बड़ी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे ने वित्तीय गड़बड़ी में शामिल सात ग्राम पंचायतों के जिम्मेदार अधिकारियों, तत्कालीन सचिवों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए हैं।
यह कार्रवाई पूटा, टीकरखुर्द, आमगांव, गांगपुर, साल्हेघोरी, पंडरीपानी और खोडरी ग्राम पंचायतों से जुड़े मामलों में की जा रही है। जांच में सामने आया कि विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि निकाली गई, लेकिन कई निर्माण कार्य या तो अधूरे मिले या धरातल पर अस्तित्व ही नहीं मिला। आरोप है कि फर्जी बिल, वाउचर और दस्तावेजों के जरिए सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया।

मामले की शुरुआत ग्रामीणों की शिकायतों से हुई थी। लगातार शिकायतों के बाद गठित जांच दल ने पंचायत अभिलेख, बैंक खातों और निर्माण स्थलों का भौतिक सत्यापन किया। जांच रिपोर्ट में सरकारी राशि के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद भी कार्रवाई में देरी से ग्रामीणों में नाराजगी थी।
अब जिला पंचायत सीईओ के निर्देश के बाद जनपद पंचायत गौरेला की ओर से संबंधित पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। एफआईआर दर्ज होते ही तत्कालीन सरपंच, सचिव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की कानूनी मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ सात ग्राम पंचायतों तक ही कार्रवाई सीमित रहेगी, या पूरे जिले में 15वें वित्त आयोग की राशि के खर्च की व्यापक जांच होगी? यदि अन्य पंचायतों की भी निष्पक्ष जांच हुई तो और बड़े खुलासे सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।















