
निजी खर्च पर नहीं चलेंगे छात्रावास! अधीक्षकों ने उठाई आवाज, एचएमएस पोर्टल की व्यवस्था सुधारने की मांग
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में छात्रावास अधीक्षक संघ ने कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त के माध्यम से आयुक्त के नाम सौंपा ज्ञापन, कंप्यूटर-इंटरनेट से लेकर मेडिकल अवकाश के विकल्प और बजट उपलब्ध कराने की उठाई मांग
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, 16 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों एवं आश्रमों में कार्यरत अधीक्षकों की समस्याएं अब सामने आने लगी हैं। विभागीय कार्यों के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी और एचएमएस पोर्टल की तकनीकी व व्यावहारिक समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ ने आवाज बुलंद की है। संघ ने कलेक्टर एवं सहायक आयुक्त के माध्यम से आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के नाम ज्ञापन सौंपकर विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग की है।

संघ का कहना है कि छात्रावासों में विद्यार्थियों की देखभाल, भोजन, सुरक्षा, स्वास्थ्य, अनुशासन और दैनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ अधीक्षकों पर ऑनलाइन कार्यों का अतिरिक्त बोझ भी डाला जा रहा है। लेकिन इन कार्यों को पूरा करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में अधीक्षकों को अपने निजी मोबाइल, इंटरनेट और जेब से पैसे खर्च कर विभागीय कामकाज करना पड़ रहा है।
संसाधन नहीं, लेकिन ऑनलाइन काम का दबाव बरकरार
संघ ने ज्ञापन में बताया कि विभाग द्वारा विद्यार्थियों की प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करने, निर्धारित प्रारूप में फोटो अपलोड करने, व्यक्तिगत प्रोफाइल तैयार करने और आय-व्यय संबंधी विवरण ऑनलाइन दर्ज करने जैसे कार्य अनिवार्य किए गए हैं। इन कार्यों के लिए कंप्यूटर, स्कैनर, इंटरनेट कनेक्शन और प्रशिक्षित कंप्यूटर ऑपरेटर की आवश्यकता होती है, लेकिन कई संस्थाओं में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।

संघ ने मांग की है कि प्रत्येक छात्रावास एवं आश्रम में आवश्यकता के अनुरूप कंप्यूटर, स्कैनर, इंटरनेट और कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि अधीक्षक बिना अतिरिक्त आर्थिक बोझ के विभागीय कार्यों का निर्वहन कर सकें।
एचएमएस पोर्टल की व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग
संघ ने स्पष्ट किया कि वह डिजिटल व्यवस्था या पारदर्शिता के खिलाफ नहीं है, बल्कि आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए बिना अधीक्षकों पर पूरी जिम्मेदारी डालने का विरोध कर रहा है।

ज्ञापन में विद्यार्थियों की उपस्थिति और व्यक्तिगत विवरण के सार्वजनिक प्रदर्शन की व्यवस्था पर भी पुनर्विचार करने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि विद्यार्थियों की निजता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसी जानकारियों तक पहुंच केवल कलेक्टर, सहायक आयुक्त और अधिकृत विभागीय अधिकारियों तक सीमित रखने पर विचार किया जाना चाहिए।
साथ ही, पोर्टल में तकनीकी त्रुटियों या विवरण अधूरे रहने की स्थिति में अधीक्षकों के विरुद्ध अनावश्यक आरोप लगाने से बचने की मांग भी की गई है।
मेडिकल अवकाश का विकल्प नहीं, अधीक्षकों की बढ़ी परेशानी
छात्रावास अधीक्षक संघ ने एचएमएस पोर्टल में विद्यार्थियों के मेडिकल अवकाश दर्ज करने का अलग विकल्प नहीं होने का मुद्दा भी उठाया है। संघ के अनुसार वायरल बुखार, टाइफाइड, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के कारण विद्यार्थियों को कई बार लंबे समय तक घर पर रहना पड़ता है।
ऐसी परिस्थितियों में पोर्टल पर उनकी अनुपस्थिति का सही विवरण दर्ज करने में परेशानी होती है। संघ ने आयुक्त कार्यालय के पत्र क्रमांक एफ 15-71/2007/25/2, दिनांक 27 सितंबर 2023 का उल्लेख करते हुए विभागीय प्रावधानों के अनुरूप पोर्टल में 30 दिनों तक के मेडिकल अवकाश का विकल्प उपलब्ध कराने की मांग की है।
बिस्तर से लेकर सफाई सामग्री तक की व्यवस्था पर सवाल
संघ ने छात्रावासों के दैनिक संचालन में उपयोग होने वाली आवश्यक सामग्रियों की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया है। ज्ञापन के अनुसार चादर, कंबल, गद्दे, बिस्तर, रजिस्टर, स्टेशनरी, झाड़ू, पोछा, हार्पिक, फिनाइल और अन्य सफाई सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं होने से व्यवस्था प्रभावित होती है।
संघ ने सवाल उठाया कि जब आवश्यक सामग्री की नियमित आपूर्ति नहीं होती, तो अधीक्षकों से सभी व्यवस्थाएं सुचारू रखने और रिकॉर्ड संधारण की अपेक्षा कैसे पूरी हो सकती है? इसके लिए पर्याप्त बजट आवंटित करने और आवश्यक सामग्रियों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन का खर्च कौन उठाएगा?
15 अगस्त, 26 जनवरी, गांधी जयंती, बाल दिवस सहित अन्य राष्ट्रीय पर्वों, विभागीय आयोजनों और विद्यार्थियों की गतिविधियों के लिए अलग से बजट उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा भी ज्ञापन में शामिल है।
संघ का कहना है कि ध्वजारोहण, सजावट, बैनर, पोस्टर और अन्य आयोजन संबंधी आवश्यकताओं पर खर्च करना पड़ता है। इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने तथा पर्याप्त राशि स्वीकृत करने की मांग की गई है, ताकि अधीक्षकों को अपनी जेब से खर्च न करना पड़े।
अधीक्षकों की जिम्मेदारी बड़ी, सुविधाएं सीमित
संघ ने कहा कि छात्रावास अधीक्षकों की भूमिका केवल विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं है। उन्हें विद्यार्थियों के भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, अनुशासन और दैनिक आवश्यकताओं की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। इसके साथ ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार करने और पोर्टल पर जानकारियां दर्ज करने का काम भी करना पड़ता है।
ऐसे में पर्याप्त संसाधनों के अभाव में अधीक्षकों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो रही है। संघ ने शासन से मांग की है कि ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि छात्रावासों का संचालन बेहतर तरीके से हो सके और अधीक्षकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ये रहे उपस्थित
ज्ञापन सौंपने के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य स्तरीय छात्रावास अधीक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष उदेश सिंह तोमर, जिला अध्यक्ष प्रीतू राज सिंह बिसेन, उपाध्यक्ष ईश्वर साहू, कोषाध्यक्ष महेश्वर श्रीवास, मो. हमीद, संयुक्त अधीक्षक संघ से अजय चौधरी एवं ओम प्रकाश सोनवानी सहित बड़ी संख्या में छात्रावास अधीक्षक उपस्थित रहे।
अब देखना होगा कि अधीक्षकों की इन मांगों पर विभागीय अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और छात्रावासों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए शासन स्तर पर कब तक निर्णय लिया जाता है।















